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Shiva chalisa gupta paath

ग्रहस्थ जीवन को सफल बनाने वाली श्री शिव चालीसा का पाठ करने से मानसिक शांति, ध्यान, और आत्मिक उन्नति होती है। शिव चालीसा महादेव की महिमा और गुणों का वर्णन करती है और उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास करती है। इस चालीसा के पाठ से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और उनका आशीर्वाद मिलता है। यह चालीसा भक्ति और निष्काम कर्म की भावना को बढाती है और व्यक्ति को जीवन में सकारात्मक दिशा में ले जाती है। शिव चालीसा के पाठ से दुःख, भय, और संकट से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को जीवन में स्थिरता और आनंद की प्राप्ति होती है।

किसी भी सोमवार से नियमित एक माला पंचाक्षरी मंत्र- ॥ॐ नमः शिवाय॥ का जप करके ३ पाठ शिव चालीसा का पाठ करे

श्री शिव चालीसा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत आये शुभ दिन की, ले करन मंगल कामना॥

नित्य कर प्रिय सदा सुब्राता, जो कोई नर ध्यावै। ता सु अमंगल हो जावै, वैदिक तन की धारा॥

धरैं ध्यान सदा शिवजी, मनवांछित फल पावै। दुर्गाम काज जगत के जेते, सुगम अनुरागी प्रिय चावै॥

भगति सहित गुण गन नित, ध्यान धरैं नित कर प्रीति। तुलसी जैसेवत गुणी त्यागी, सो नर मुक्ति को चाहे॥

जिसकी जीवन में अविचल विश्वास, सुर मुनि इतने तुलसी भाव। तिनके होत शमन अंगिकारी, आपन मुक्ति का चाहै॥

भारी सुब्रात व्रत तिन धरै, सदा वैदिक विधान धरैं। तुम सम जानकर संकट समुद्र दुःखारी, करहुं कृपा शिव नाथ॥

चालीसा पढ़त शिव मैं मन लायो, विघ्न विनाशक कल्याणी सुखदायो। मंगल कारण भवन की ज्यों लायो, यशोदा चरित्र अच्छाधायो॥

सेवक संत सज्जन स्तुति करत, नित्य करहु प्रनाम। ब्रह्म विष्णु सदाशिव जन अरद्ध, नारद शारदा विष्णु वामी॥

चालीसा नित्य सुनहु मेरे नाथ, भव भय हारण मंगल कारण। अब मोहि आस नहीं जो कुछ भावउ, अस ही भवानि दीन दयाल॥

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