Unmattha Bhairava Mantra for freedom from troubles

BOOK - 26-27 SEPT. 2026- DAKSHIN KALI SADHANA SHIVIR AT DIVYAYOGA ASHRAM (ONLINE/ OFFLINE)

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संकटों से मुक्ति दिलाने वाए उन्मत्त भैरव भगवान शिव के आठ भैरव रूपों में से एक हैं। उन्मत्त भैरव का स्वरूप अत्यंत उग्र और दिव्य है। उनका उद्देश्य अपने भक्तों की सभी बाधाओं और संकटों से रक्षा करना है। उन्मत्त भैरव को जाग्रत और शक्तिशाली देवता माना जाता है, जो अपने भक्तों को भय और संकटों से मुक्त करते हैं और उन्हें जीवन की हर समस्या से निजात दिलाते हैं।

उन्मत्त भैरव का मंत्र और उसका संपूर्ण अर्थ

मंत्र: ॐ भ्रं उन्मत्त भैरवाय नमः

अर्थ: इस मंत्र का अर्थ है कि हम उन्मत्त भैरव की स्तुति करते हैं और उन्हें नमस्कार करते हैं। “ॐ” एक पवित्र ध्वनि है, “भ्रं” बीज मंत्र है जो उन्मत्त भैरव को समर्पित है। “उन्मत्त भैरवाय” का अर्थ है उन्मत्त भैरव को, और “नमः” का अर्थ है नमस्कार या समर्पण।

लाभ

  1. सुरक्षा: उन्मत्त भैरव का मंत्र जपने से व्यक्ति को सभी प्रकार के भय और असुरक्षा से मुक्ति मिलती है।
  2. आत्म-विश्वास: इस मंत्र के नियमित जप से आत्म-विश्वास और आत्म-संयम में वृद्धि होती है।
  3. शत्रुओं से मुक्ति: यह मंत्र शत्रुओं और बुरे प्रभावों से रक्षा करता है।
  4. रोगों से छुटकारा: उन्मत्त भैरव का आशीर्वाद सभी प्रकार के रोगों और बिमारियों को दूर करता है।
  5. धन-संपत्ति: मंत्र का जप करने से आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है।
  6. शांति और संतुलन: मानसिक शांति और संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
  7. आध्यात्मिक उन्नति: यह मंत्र आध्यात्मिक मार्ग पर प्रगति करने में सहायक होता है।
  8. विवाह संबंधित समस्याओं का समाधान: विवाह और वैवाहिक जीवन में आ रही समस्याओं का समाधान होता है।
  9. संतान प्राप्ति: यह मंत्र संतान प्राप्ति के लिए भी प्रभावी माना जाता है।
  10. कार्य सिद्धि: किसी भी कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण करने में सहायता मिलती है।
  11. दुर्घटना से बचाव: दुर्घटनाओं और आपदाओं से बचाव होता है।
  12. नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति: नकारात्मक ऊर्जा और बुरी आत्माओं से रक्षा होती है।
  13. सफलता: जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।
  14. ज्ञान और बुद्धि: ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है।
  15. सुख-समृद्धि: सुख-समृद्धि और शांति का वातावरण बनता है।
  16. कर्म सुधार: व्यक्ति के कर्मों में सुधार और सकारात्मकता आती है।
  17. स्वास्थ्य: उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
  18. यात्रा में सुरक्षा: यात्रा के दौरान सुरक्षा और सफलता मिलती है।
  19. मंत्र सिद्धि: मंत्र के नियमित जप से मंत्र सिद्धि प्राप्त होती है।
  20. अन्य समस्याओं का समाधान: जीवन में आने वाली अन्य समस्याओं का समाधान होता है।

विधि

मंत्र जप का दिन और मुहूर्त

उन्मत्त भैरव के मंत्र का जप मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त, अमावस्या और अष्टमी तिथि भी इस मंत्र के जप के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

मंत्र जप की अवधि

रोज़ाना सुबह और शाम के समय मंत्र का जप करना चाहिए। प्रत्येक समय कम से कम 108 बार मंत्र का जप करने का प्रयास करें। नियमित जप करने से अधिक लाभ प्राप्त होते हैं।

नियम

  1. स्वच्छता: मंत्र जप से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. शुद्धि: मन, वचन, और कर्म की शुद्धि बनाए रखें।
  3. स्थान: शांति और स्वच्छता वाला स्थान चुनें।
  4. ध्यान: उन्मत्त भैरव की तस्वीर या मूर्ति के सामने बैठकर ध्यान करें।
  5. संकल्प: मंत्र जप से पहले संकल्प लें और देवी-देवताओं का आह्वान करें।
  6. आसन: कुश के आसन का प्रयोग करें।
  7. माला: रुद्राक्ष या सफेद चन्दन की माला से मंत्र का जप करें।
  8. समय: नियमित रूप से एक ही समय पर जप करने का प्रयास करें।
  9. भोजन: शुद्ध और सात्विक भोजन करें।
  10. समर्पण: पूर्ण समर्पण और विश्वास के साथ जप करें।

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सावधानियाँ

  1. विचलन से बचें: जप के दौरान मन को एकाग्र रखें और विचलित न होने दें।
  2. सात्विक आहार: जप के दौरान सात्विक आहार का पालन करें।
  3. अल्कोहल और मांसाहार से बचें: जप के दौरान अल्कोहल और मांसाहार से बचें।
  4. सकारात्मक सोच: हमेशा सकारात्मक सोच रखें और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
  5. समर्पण: पूर्ण समर्पण और श्रद्धा के साथ जप करें।

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मंत्र से संबंधित प्रश्न उत्तर

  1. उन्मत्त भैरव कौन हैं?
    उन्मत्त भैरव भगवान शिव का एक उग्र और भयंकर रूप हैं, जो अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें शत्रुओं से मुक्ति दिलाते हैं।
  2. उन्मत्त भैरव का मंत्र क्या है?
    उन्मत्त भैरव का मंत्र है: ॐ भ्रं उन्मत्त भैरवाय नमः।
  3. इस मंत्र का अर्थ क्या है?
    इस मंत्र का अर्थ है कि हम उन्मत्त भैरव की स्तुति करते हैं और उन्हें नमस्कार करते हैं।
  4. मंत्र का जप किस दिन करें?
    मंत्र का जप मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
  5. मंत्र जप का उचित समय क्या है?
    मंत्र जप का उचित समय सुबह और शाम का है।
  6. मंत्र जप के लाभ क्या हैं?
    मंत्र जप के लाभों में सुरक्षा, आत्म-विश्वास, रोगों से मुक्ति, धन-संपत्ति की प्राप्ति, और मानसिक शांति शामिल हैं।
  7. मंत्र जप के नियम क्या हैं?
    मंत्र जप के नियमों में स्वच्छता, शुद्धि, शांत और स्वच्छ स्थान का चयन, ध्यान, और नियमितता शामिल हैं।
  8. मंत्र जप के दौरान क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
    मंत्र जप के दौरान विचलन से बचें, सात्विक आहार का पालन करें, और अल्कोहल तथा मांसाहार से दूर रहें।
  9. क्या मंत्र जप से शत्रुओं से मुक्ति मिल सकती है?
    हां, उन्मत्त भैरव का मंत्र जप शत्रुओं से मुक्ति दिलाता है।
  10. क्या मंत्र जप से आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है?
    हां, इस मंत्र का जप आर्थिक स्थिति में सुधार लाता है।
  11. क्या मंत्र जप से स्वास्थ्य में लाभ होता है?
    हां, मंत्र जप उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करता है।
  12. मंत्र जप के लिए कौन सी माला उपयुक्त है?
    रुद्राक्ष या सफेद चन्दन की माला उपयुक्त मानी जाती है।

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