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Shani Sade Sati Secrets Of Makar Sankranti Revealed

शनि साढ़ेसाती में मकर संक्रांति का यह रहस्य क्यों अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है

शनि साढ़ेसाती जीवन की सबसे गहन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। यह केवल कष्ट देने की अवधि नहीं, बल्कि आत्मशोधन का समय होता है। मकर संक्रांति इस प्रक्रिया में एक विशेष आध्यात्मिक द्वार खोलती है।

बहुत कम लोग जानते हैं कि साढ़ेसाती के दौरान मकर संक्रांति का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। यह दिन शनि के स्वभाव को शांत करने की अद्भुत क्षमता रखता है। DivyayogAshram के अनुसार यह रहस्य शास्त्रों में संकेत रूप में छिपा है।

जब सही समय और सही भाव से उपाय किया जाए, तो शनि की कठोरता करुणा में बदल सकती है। यही इस रहस्य का मूल है।


शनि साढ़ेसाती क्या है और यह जीवन को कैसे प्रभावित करती है

शनि साढ़ेसाती लगभग साढ़े सात वर्षों की अवधि होती है। यह चंद्र राशि से जुड़ी हुई प्रक्रिया मानी जाती है। इस समय शनि तीन राशियों से होकर गुजरते हैं।

पहला चरण चेतावनी का समय होता है। दूसरा चरण सबसे कठिन माना जाता है। तीसरा चरण धीरे धीरे राहत देता है।

इस अवधि में व्यक्ति का धैर्य, कर्म और ईमानदारी परखा जाता है। जो लोग कर्म से भागते हैं, उन्हें अधिक कष्ट मिलता है।
जो लोग स्वीकार और संयम रखते हैं, वे भीतर से मजबूत बनते हैं।

शनि साढ़ेसाती परिवर्तन की प्रक्रिया है, दंड की नहीं।


मकर संक्रांति और शनि साढ़ेसाती का गूढ़ संबंध

मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का पर्व है। मकर राशि का स्वामी शनि देव माने जाते हैं। इस दिन सूर्य और शनि का विशेष संतुलन बनता है।

साढ़ेसाती के दौरान यह संतुलन अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। शनि कर्म का फल देते हैं, सूर्य आत्मबल बढ़ाते हैं। दोनों का मिलन जीवन दिशा सुधारने का अवसर देता है।

शास्त्रों में कहा गया है कि मकर संक्रांति पर शनि विशेष रूप से जागृत रहते हैं। इस दिन किया गया छोटा उपाय भी गहरा प्रभाव छोड़ता है।


शनि साढ़ेसाती में मकर संक्रांति का छुपा हुआ रहस्य

यह रहस्य उपाय से नहीं, भाव से जुड़ा है। अधिकतर लोग केवल बाहरी कर्म करते हैं। लेकिन शनि अंतर की शुद्धि चाहते हैं।

मकर संक्रांति पर यदि व्यक्ति कर्म स्वीकार कर ले, तो शनि की कठोरता स्वतः कम होने लगती है। इस दिन आत्ममंथन सबसे बड़ा उपाय माना गया है।

बहुत कम लोग जानते हैं कि शनि साढ़ेसाती में मकर संक्रांति पर मौन और संयम सबसे प्रभावी साधन हैं। बिना दिखावे का दान शनि को शीघ्र शांत करता है।


मकर संक्रांति पर शनि साढ़ेसाती में करने योग्य विशेष साधना

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में जागना श्रेष्ठ माना गया है। स्नान के जल में काले तिल मिलाना लाभकारी होता है। मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें।

शनि देव के सामने सरसों तेल का दीपक जलाएं। दीपक जलाते समय मन स्थिर रखें। केवल एक ही मंत्र का जप करें।

मंत्र है
ॐ शं शनैश्चराय नमः

108 बार जप पर्याप्त माना गया है।
इसके बाद श्रमिक या वृद्ध को भोजन कराएं।

यह साधना बाहरी नहीं, आंतरिक परिवर्तन लाती है।


शनि साढ़ेसाती में तिल और तेल का रहस्यमय महत्व

काले तिल शनि तत्व का प्रतीक माने जाते हैं। ये कर्मों की ग्रंथि को ढीला करते हैं। मकर संक्रांति पर इनका दान विशेष फल देता है।

सरसों तेल स्थिरता और धैर्य का प्रतीक है। तेल का दीपक शनि की दृष्टि को सौम्य बनाता है। यह उपाय बिना शब्दों के संवाद करता है।

DivyayogAshram के अनुभव में नियमित तिल और तेल से जुड़े उपाय शनि प्रभाव कम करते हैं।


शनि साढ़ेसाती में मकर संक्रांति पर किन बातों से बचना चाहिए

  • इस दिन क्रोध शनि को अत्यंत अप्रसन्न करता है।
  • झूठ और छल से पूर्ण दूरी रखें। मांस और मदिरा से बचना आवश्यक है।
  • दान के बाद अपेक्षा न रखें। किसी को अपमानित न करें।
  • मजदूर और सेवक का सम्मान करें।
  • शनि साढ़ेसाती में अनुशासन ही सबसे बड़ा उपाय है।

शनि साढ़ेसाती में मानसिक कष्ट और मकर संक्रांति का समाधान

  • साढ़ेसाती का सबसे गहरा प्रभाव मन पर पड़ता है।
  • डर, अकेलापन और निराशा बढ़ सकती है।
  • मकर संक्रांति इन भावों को बदलने का अवसर देती है।
  • इस दिन मौन रखना अत्यंत लाभकारी माना गया है।
  • मौन शनि के कंपन से सीधा संवाद करता है।
  • मन धीरे धीरे स्थिर होने लगता है।

यह रहस्य बहुत कम लोग अपनाते हैं।


शनि साढ़ेसाती में मकर संक्रांति से जुड़े अनुभव

DivyayogAshram से जुड़े साधकों ने विशेष परिवर्तन अनुभव किए हैं।

  • कई लोगों के रुके निर्णय स्पष्ट हुए।
  • मानसिक बोझ हल्का महसूस हुआ।
  • जीवन में अनुशासन और स्थिरता बढ़ी।
  • यह परिवर्तन धीरे आया, लेकिन स्थायी रहा।

शनि का कार्य चमत्कार नहीं, निर्माण है।


किन लोगों के लिए यह रहस्य सबसे अधिक उपयोगी है

  • जिनकी शनि साढ़ेसाती चल रही हो।
  • जिन्हें बार बार असफलता मिल रही हो।
  • जिनका आत्मविश्वास टूट रहा हो।
  • जो लोग मेहनत के बाद भी फल नहीं पा रहे। जो भीतर से थक चुके हैं।
  • मकर संक्रांति का यह रहस्य उनके लिए संजीवनी बन सकता है।

शनि साढ़ेसाती और मकर संक्रांति का सच्चा अर्थ

  • शनि साढ़ेसाती सजा नहीं, साधना है।
  • मकर संक्रांति केवल पर्व नहीं, चेतना का द्वार है।
  • यह रहस्य बाहरी कर्म से नहीं खुलता।
  • जो व्यक्ति स्वीकार, संयम और सेवा अपनाता है, उसके लिए शनि मार्गदर्शक बन जाते हैं।

यही शनि साढ़ेसाती में मकर संक्रांति का वास्तविक रहस्य है।

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