मकर संक्रांति और शनि का गहरा संबंध क्यों समझना आवश्यक है
मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं है। यह शनि से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील आध्यात्मिक समय होता है। इस दिन की गई एक छोटी भूल भी भारी पड़ सकती है। मकर राशि के स्वामी शनि देव माने जाते हैं। मकर संक्रांति पर सूर्य इसी राशि में प्रवेश करते हैं। इस कारण शनि की ऊर्जा इस दिन अत्यंत सक्रिय रहती है।
DivyayogAshram के अनुभव के अनुसार अधिकतर लोग इस दिन का महत्व समझे बिना कर्म कर बैठते हैं। यही कारण है कि लाभ की जगह हानि अनुभव होती है। मकर संक्रांति पर शनि को समझना, उन्हें शांत करने से पहले आवश्यक हो जाता है।
मकर संक्रांति का आध्यात्मिक अर्थ और शनि तत्व
- मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का पहला दिन है।
- यह अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा का संकेत देता है।
- शनि भी अज्ञान से बोध की ओर ले जाते हैं।
- शनि कर्म, अनुशासन और सत्य के ग्रह हैं।
- वे दिखावे से नहीं, आचरण से प्रसन्न होते हैं।
- मकर संक्रांति इसी आचरण की परीक्षा लेती है।
- इस दिन किया गया प्रत्येक कर्म
- शनि के खाते में विशेष रूप से दर्ज होता है।
- इसलिए लापरवाही भारी पड़ सकती है।
मकर संक्रांति और शनि देव का गूढ़ ज्योतिषीय संबंध
ज्योतिष शास्त्र में मकर संक्रांति को शनि का सक्रिय काल माना गया है।
सूर्य और शनि का यह संयोग दुर्लभ माना जाता है।
यह समय संतुलन का अवसर देता है।
यदि व्यक्ति अहंकार में रहता है,
तो शनि उसी अहंकार को तोड़ते हैं।
यदि व्यक्ति विनम्र है,
तो शनि मार्गदर्शक बनते हैं।
इस संतुलन को न समझना
मकर संक्रांति की सबसे बड़ी भूल मानी जाती है।
मकर संक्रांति पर शनि से जुड़ी सबसे सामान्य भूल
- अधिकतर लोग केवल दान को ही उपाय मान लेते हैं।
- वे अपने व्यवहार पर ध्यान नहीं देते।
- यहीं सबसे बड़ी गलती होती है।
- शनि बाहरी दान से अधिक
- आंतरिक अनुशासन चाहते हैं।
- यदि दान के साथ अहंकार जुड़ा हो, तो शनि अप्रसन्न होते हैं।
- मकर संक्रांति पर किसी का अपमान या कठोर शब्द बोलना शनि दोष को बढ़ा सकता है।
शनि के दिन मकर संक्रांति पर क्या नहीं करना चाहिए
- इस दिन झूठ बोलना भारी पड़ सकता है।
- किसी कमजोर का शोषण नहीं करना चाहिए।
- मजदूर और सेवक का अपमान वर्जित है।
- मांस और मदिरा का सेवन
- शनि ऊर्जा को विकृत करता है।
- क्रोध और अधीरता से बचना आवश्यक है।
- यह भूल कई वर्षों तक असर दिखा सकती है।
मकर संक्रांति पर शनि पूजा में की जाने वाली सूक्ष्म गलतियां
- अधूरी श्रद्धा शनि को स्वीकार नहीं होती।
- मंत्र जप करते समय मन भटकना दोष बढ़ाता है।
- जल्दबाजी में दीपक जलाना भी त्रुटि है।
- सरसों तेल का दीपक
- शांति और धैर्य से जलाना चाहिए।
- दीपक बुझने पर क्रोध नहीं करना चाहिए।
- शनि पूजा में धैर्य ही मूल साधना है।
मकर संक्रांति पर शनि दान का सही भाव
- दान केवल वस्तु का नहीं होता।
- दान भावना का भी होता है।
- यदि भावना शुद्ध नहीं, तो दान निष्फल हो सकता है।
- काले तिल, लोहे या वस्त्र का दान नम्रता से करना चाहिए।
- दान के बाद चर्चा करना शनि को अप्रसन्न करता है।
DivyayogAshram के अनुसार गुप्त दान सबसे प्रभावी होता है।
शनि और मकर संक्रांति में मौन का रहस्य
- बहुत कम लोग इस रहस्य को जानते हैं।
- मकर संक्रांति पर मौन रखना
- शनि को शीघ्र शांत करता है।
- मौन से मन स्थिर होता है।
- शनि स्थिरता के ग्रह हैं।
- इसलिए मौन उनका प्रिय माध्यम है।
- यदि पूरे दिन मौन संभव न हो, तो कम से कम एक घंटा मौन रखें।
- यह छोटी साधना बड़ा प्रभाव देती है।
मकर संक्रांति पर शनि साढ़ेसाती वालों के लिए विशेष चेतावनी
- साढ़ेसाती के समय शनि अत्यंत सूक्ष्म हो जाते हैं।
- इस दिन की गई भूल कठिन अनुभव दे सकती है।
क्रोध, निराशा और आत्मदया साढ़ेसाती में सबसे खतरनाक भाव हैं। मकर संक्रांति पर इन्हें त्यागना आवश्यक है।
यह दिन आत्मस्वीकृति का है। यही शनि की परीक्षा है।
शनि और मकर संक्रांति में कर्म सुधार का अवसर
- मकर संक्रांति केवल डर का विषय नहीं।
- यह सुधार का अवसर भी देती है।
- शनि सुधार चाहते हैं, दंड नहीं।
- यदि व्यक्ति अपनी गलतियों को स्वीकार करे, तो शनि सहायता करने लगते हैं।
- यह रहस्य बहुत कम लोग समझते हैं।
- कर्म बदलते ही शनि का प्रभाव भी बदलने लगता है।
मकर संक्रांति पर शनि कृपा पाने का सरल मार्ग
- साधारण जीवन, सच्चा व्यवहार और नियमित मेहनत शनि को शीघ्र प्रसन्न करते हैं।
- मकर संक्रांति पर इन गुणों को अपनाने का संकल्प लें। यही सबसे सुरक्षित उपाय है।
- बिना भय, बिना दिखावे शनि की राह पर चलें।
मकर संक्रांति और शनि से जुड़े अनुभव
- DivyayogAshram से जुड़े लोगों ने इस दिन व्यवहार सुधार से गहरे परिवर्तन अनुभव किए हैं।
- रुके कार्य धीरे धीरे चले। मन में स्थिरता आई। भय कम हुआ।
- यह सब बिना जटिल उपायों के हुआ।
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मकर संक्रांति पर शनि की एक भूल क्यों भारी पड़ती है
- मकर संक्रांति शनि का परीक्षण दिवस है। यह केवल पूजा का दिन नहीं। यह आचरण का दिन है।
- यदि व्यक्ति सावधान नहीं रहा, तो एक भूल जीवन को कठिन बना सकती है। यदि सजग रहा, तो वही दिन जीवन बदल सकता है।
- शनि न्यायप्रिय हैं, निर्दयी नहीं। यही मकर संक्रांति का वास्तविक संदेश है।








