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Mahashivratri Shiva Parvati Ritual For Child & Marital Happiness

संतान सुख और सुखी दांपत्य जीवन का वरदान | महाशिवरात्रि पर शिव पार्वती पूजन से प्राप्त होने वाली दिव्य कृपा

Mahashivratri Shiva Parvati Ritual संतान सुख और सुखी दांपत्य जीवन हर परिवार की सबसे गहरी कामना होती है। विवाह के बाद जब वर्षों तक संतान का सुख न मिले, या दांपत्य जीवन में लगातार तनाव बना रहे, तो मन भीतर से टूटने लगता है। समाज, परिवार और स्वयं की अपेक्षाएं धीरे धीरे बोझ बन जाती हैं। कई बार चिकित्सकीय प्रयास होते हैं, पर मानसिक तनाव और आपसी दूरी के कारण परिणाम नहीं मिल पाता।

भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में संतान और दांपत्य को केवल शारीरिक विषय नहीं माना गया है। इसे मन, भाव और ऊर्जा के संतुलन से जोड़ा गया है। शिव और पार्वती का स्वरूप इसी संतुलन का प्रतीक है। शिव चेतना हैं और पार्वती सृजन शक्ति। जब दोनों का संतुलन बनता है, तभी जीवन में प्रेम, स्थिरता और संतान सुख का प्रवाह होता है।

DivyayogAshram के अनुभव में महाशिवरात्रि पर किया गया शिव पार्वती पूजन उन दंपत्तियों के लिए विशेष रूप से सहायक रहा है, जो संतान सुख या वैवाहिक सामंजस्य की कामना कर रहे हैं।


शिव और पार्वती का तात्त्विक अर्थ

शिव और पार्वती केवल देव दंपत्ति नहीं हैं। वे जीवन के दो मूल तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

शिव 

  • स्थिरता
  • चेतना
  • धैर्य
  • विवेक

पार्वती

  • सृजन
  • प्रेम
  • करुणा
  • पोषण

जब जीवन में केवल प्रयास होता है और करुणा नहीं, तो कठोरता आती है। जब केवल भाव होता है और स्थिरता नहीं, तो असंतुलन बढ़ता है। शिव पार्वती पूजन इन दोनों को संतुलित करता है।


संतान सुख और दांपत्य में बाधा के वास्तविक कारण

कई बार संतान सुख या दांपत्य में समस्या का कारण केवल शारीरिक नहीं होता।

मानसिक कारण

  • अत्यधिक तनाव
  • भय और चिंता
  • निराशा
  • आपसी संवाद की कमी

भावनात्मक कारण

  • एक दूसरे को दोष देना
  • अपेक्षाओं का बोझ
  • पुराने दुख और शिकायतें

ऊर्जा असंतुलन

  • मन का लगातार अशांत रहना
  • स्त्री और पुरुष ऊर्जा का असंतुलन

DivyayogAshram मानता है कि जब इन कारणों पर काम किया जाता है, तभी पूजा और साधना अपना प्रभाव दिखाती है।


महाशिवरात्रि का विशेष महत्व

महाशिवरात्रि को शिव और शक्ति के मिलन की रात्रि माना गया है। यह केवल उपवास या जागरण की रात नहीं है। यह वह समय है, जब चेतना और सृजन शक्ति एक दूसरे के सबसे निकट होते हैं।

इस रात्रि

  • मन स्वाभाविक रूप से अंतर्मुखी होता है
  • भावनाएं गहरी होती हैं
  • संकल्प अधिक प्रभावी बनते हैं

इसी कारण संतान सुख और दांपत्य के लिए महाशिवरात्रि पर किया गया पूजन विशेष फलदायी माना गया है।


शिव पार्वती पूजन कब और क्यों करें

यह पूजन उन दंपत्तियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना गया है

  • जिन्हें विवाह के बाद संतान सुख में देरी हो रही हो
  • जिनके वैवाहिक जीवन में लगातार तनाव हो
  • जिनके बीच संवाद और समझ कम हो गई हो
  • जो भीतर से थक चुके हों

यह पूजन किसी को दोष देने के लिए नहीं, बल्कि संबंधों को ठीक करने के लिए किया जाता है।


महाशिवरात्रि पर पूजन का उपयुक्त मुहूर्त

महाशिवरात्रि की पूरी रात्रि पूजन और साधना के लिए शुभ मानी जाती है।

श्रेष्ठ समय

  • संध्या काल के बाद
  • रात्रि का मध्य भाग
  • यदि संभव हो तो निशिता काल

यदि पूरी रात जागना संभव न हो, तो भी शांत रात्रि में किया गया पूजन प्रभावी रहता है।


पूजन से पहले आवश्यक मानसिक तैयारी

इस पूजन में भाव सबसे महत्वपूर्ण है।

पूजन से पहले

  • एक दूसरे के प्रति कटुता को छोड़ने का संकल्प लें
  • शिकायतों को कुछ समय के लिए विराम दें
  • परिणाम की अधीरता छोड़ें
  • पूजन को प्रेम और स्वीकार का माध्यम बनाएं

DivyayogAshram के अनुसार जब मन नरम होता है, तभी कृपा का प्रवाह होता है।


शिव पार्वती का मंत्र

यह मंत्र सरल है और दंपत्ति दोनों के लिए उपयुक्त माना गया है।

मंत्र:
ॐ गौरी शंकराय नमः


अर्थ

  • चेतना का मूल स्वर
  • गौरी शंकराय सृजन और चेतना का संतुलन
  • नमः अहंकार का त्याग

मंत्र का अर्थ समझकर जप करने से उसका प्रभाव अधिक गहरा होता है।


महाशिवरात्रि पर शिव पार्वती पूजन विधि

आवश्यक सामग्री

  • शिवलिंग या शिव पार्वती चित्र
  • जल
  • बेलपत्र
  • सफेद या हल्के वस्त्र
  • दीपक
  • पुष्प

विधि

  1. महाशिवरात्रि के दिन स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. शांत स्थान पर शिवलिंग या चित्र स्थापित करें।
  3. दीपक जलाएं और कुछ क्षण मौन रखें।
  4. शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें।
  5. दंपत्ति मिलकर मंत्र का 108 बार जप करें।
  6. जप के बाद संतान सुख और आपसी सामंजस्य की प्रार्थना करें।
  7. अंत में एक दूसरे के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें।

पूरी प्रक्रिया लगभग 30 से 40 मिनट में पूर्ण हो जाती है।


पूजन के दौरान पालन करने योग्य नियम

  • पूजन के समय विवाद न करें
  • नकारात्मक चर्चा से बचें
  • सरल और सात्विक भोजन करें
  • एक दूसरे को दोष न दें

नियम कठोर नहीं हैं, पर पूजन को गहराई देते हैं।


इस पूजन से मिलने वाले प्रमुख लाभ

1. मानसिक शांति

मन का भारीपन कम होता है।

2. आपसी संवाद में सुधार

बातचीत सहज होने लगती है।

3. तनाव में कमी

दांपत्य का तनाव हल्का पड़ता है।

4. भावनात्मक जुड़ाव

एक दूसरे के प्रति अपनापन बढ़ता है।

5. धैर्य

प्रतीक्षा और सहनशीलता आती है।

6. स्त्री पुरुष ऊर्जा संतुलन

सृजन शक्ति जाग्रत होती है।

7. संतान सुख की संभावनाएं

अनुकूल स्थितियां बनने लगती हैं।

8. भय में कमी

भविष्य को लेकर डर कम होता है।

9. विश्वास

ईश्वर और जीवन पर भरोसा बढ़ता है।

10. नकारात्मक सोच में कमी

मन हल्का महसूस करता है।

11. आत्मस्वीकृति

स्वयं को दोष देना कम होता है।

12. संबंधों में मधुरता

कटुता धीरे धीरे समाप्त होती है।

13. आध्यात्मिक संतुलन

भीतर शांति का अनुभव होता है।

14. परिवार में सकारात्मकता

घर का वातावरण सुधरता है।

15. दीर्घकालिक स्थिरता

दांपत्य और परिवार में संतुलन बना रहता है।


संतान सुख का वास्तविक अर्थ

संतान सुख केवल गर्भधारण तक सीमित नहीं है।
इसका अर्थ है

  • प्रेमपूर्ण वातावरण
  • मानसिक स्थिरता
  • आपसी समझ

DivyayogAshram के अनुसार जब यह आधार बनता है, तब संतान सुख की राह स्वाभाविक रूप से खुलती है।


सामान्य शंकाएं

क्या यह पूजन सभी कर सकते हैं

हां। यह पूजन सरल और सुरक्षित है।

क्या केवल एक रात पर्याप्त है

महाशिवरात्रि विशेष प्रभावी होती है, पर नियमित स्मरण लाभ बढ़ाता है।

क्या तुरंत परिणाम मिलते हैं

परिणाम धीरे धीरे स्पष्ट होते हैं, पर स्थायी होते हैं।

BOOK PUJAN SHIVIR


एक महत्वपूर्ण समझ

यह पूजन किसी चमत्कार की मांग नहीं है।
यह स्वयं को संतुलित करने का माध्यम है।

जब दंपत्ति भीतर से शांत और एक दूसरे के प्रति संवेदनशील होते हैं, तब शिव पार्वती की कृपा सहज रूप से जीवन में उतरने लगती है।


अंत मे

संतान सुख और सुखी दांपत्य जीवन का वरदान तभी मिलता है, जब जीवन में चेतना और सृजन शक्ति का संतुलन बनता है। महाशिवरात्रि पर किया गया शिव पार्वती पूजन इस संतुलन को स्थापित करने का दिव्य अवसर है।

DivyayogAshram के अनुभव में यह पूजन उन दंपत्तियों के लिए आशा का प्रकाश बना है, जो लंबे समय से निराशा और तनाव से जूझ रहे थे।

जब यह पूजन श्रद्धा, धैर्य और प्रेम के साथ किया जाता है, तब शिव और पार्वती की संयुक्त कृपा से जीवन में वह स्थिरता और आनंद आता है, जिससे संतान सुख और सुखी दांपत्य जीवन का मार्ग खुलने लगता है।


BOOK - 21-22 FEB. 2025- BAGALAMUKHI SADHANA SHIVIR AT DIVYAYOGA ASHRAM (ONLINE/ OFFLINE)

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