पितृ और श्रापित दोष निवारण पूजन 2026 | सर्व पित्री अमावस्या विशेष पूजा
सर्व पित्री अमावस्या पितरों के स्मरण, श्रद्धा, तर्पण और धार्मिक कर्मों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी अवसर पर DivyayogAshram द्वारा पितृ और श्रापित दोष निवारण पूजन आयोजित किया जा रहा है।
यह विशेष पूजन उन परिवारों के लिए रखा गया है, जो अपने पितरों की शांति और कृपा के लिए धार्मिक अनुष्ठान करना चाहते हैं। साधक इसे आश्रम में उपस्थित होकर अथवा Online माध्यम से करवा सकते हैं।
तिथि: 10 अक्टूबर 2026
अवसर: सर्व पित्री अमावस्या
आयोजन: DivyayogAshram
पूजन माध्यम: Online / Offline
Call / WhatsApp: 7710812329
सर्व पित्री अमावस्या का धार्मिक महत्व
पितृ पक्ष की अमावस्या को सामान्यतः सर्व पितृ अमावस्या या सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक परंपरा में इस दिन दिवंगत पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, दान और प्रार्थना की जाती है।
जिन लोगों को अपने पूर्वजों की सही श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं होती, वे भी परंपरानुसार इस अमावस्या पर उनका स्मरण कर सकते हैं।
श्रद्धा का मूल भाव केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं है। यह अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और परिवार की परंपरा को स्मरण करने का अवसर भी है।
पितृ दोष क्या माना जाता है?
ज्योतिषीय परंपराओं में कुछ विशेष ग्रह स्थितियों को पितृ दोष से जोड़ा जाता है। इसकी व्याख्या अलग-अलग ज्योतिष परंपराओं में भिन्न हो सकती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, मंत्र जप, दान और विशेष पूजन किए जाते हैं।
DivyayogAshram का यह आयोजन इन्हीं पारंपरिक धार्मिक विधियों के आधार पर किया जाएगा।
श्रापित दोष क्या है?
वैदिक ज्योतिष की कुछ परंपराओं में शनि और राहु सहित कुछ ग्रह-संयोगों को श्रापित दोष कहा जाता है। अलग-अलग ज्योतिषियों में इसकी परिभाषा और फलादेश अलग हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति में धार्मिक उपाय के रूप में शांति पूजन, मंत्र जप, हवन और दान जैसी विधियां अपनाई जाती हैं।
यह पूजन आध्यात्मिक और धार्मिक उद्देश्य से किया जाता है। इसे किसी निश्चित सांसारिक परिणाम की गारंटी नहीं समझना चाहिए।
10 अक्टूबर 2026 को विशेष पूजन
DivyayogAshram में सर्व पित्री अमावस्या के अवसर पर पितृ और श्रापित दोष निवारण के लिए विशेष संकल्प पूजन आयोजित किया जाएगा।
पूजन में परंपरा और निर्धारित संकल्प के अनुसार पितृ स्मरण, देव पूजन, मंत्र जप, तर्पण तथा संबंधित शांति विधान शामिल किए जा सकते हैं।
मुख्य प्रार्थना निम्न उद्देश्यों के लिए रखी जाएगी:
- वंश वृद्धि: परिवार और आने वाली पीढ़ियों के कल्याण की प्रार्थना।
- नज़र एवं ऊपरी बाधा से सुरक्षा: आध्यात्मिक रक्षा और सकारात्मकता की कामना।
- आर्थिक उन्नति: आजीविका, कार्य और आर्थिक स्थिरता के लिए प्रार्थना।
- सुखमय परिवार: पारिवारिक शांति, प्रेम और आपसी सामंजस्य की कामना।
- पितृ शांति: दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और शांति की प्रार्थना।
- जीवन की बाधाओं की शांति: निरंतर आने वाली परेशानियों से राहत के लिए आध्यात्मिक संकल्प।
पूजन की संभावित धार्मिक विधि
- पूजन का आरंभ शुद्धिकरण और संकल्प से किया जाएगा। इसके बाद गणेश पूजन, गुरु स्मरण और संबंधित देवताओं का आवाहन किया जा सकता है।
- पितरों के निमित्त नाम और गोत्र के साथ संकल्प लिया जाएगा। इसके बाद पितृ मंत्र जप, तर्पण तथा शांति प्रार्थना की जाएगी।
- आवश्यकतानुसार श्रापित दोष निवारण के लिए विशेष मंत्र जप और हवन भी पूजन का भाग हो सकता है।
- पूजन की वास्तविक विधि साधक के संकल्प और DivyayogAshram द्वारा निर्धारित अनुष्ठान क्रम के अनुसार रहेगी।
विशेष पितृ मंत्र
पितृ स्मरण के समय श्रद्धापूर्वक निम्न मंत्र का जप किया जा सकता है:
॥ ॐ ऐं श्रीं सर्व पित्राय स्वधा ॥
मंत्र जप करते समय अपने दिवंगत पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें। संख्या से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा, एकाग्रता और सात्त्विक भाव माना जाता है।
Online पितृ दोष निवारण पूजन
जो श्रद्धालु व्यक्तिगत रूप से DivyayogAshram नहीं पहुंच सकते, उनके लिए Online Puja का विकल्प उपलब्ध रखा जा सकता है।
Online पूजन के लिए साधक का नाम, गोत्र और संकल्प लिया जा सकता है। परिवार के अन्य सदस्यों के लिए पूजन करवाना हो, तो आवश्यक विवरण पहले उपलब्ध कराएं।
पूजन की प्रक्रिया, आवश्यक विवरण और सहभागिता की जानकारी बुकिंग के समय DivyayogAshram से प्राप्त करें।
Offline पूजन
जो श्रद्धालु प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होना चाहते हैं, वे DivyayogAshram में आयोजित पूजन में भाग ले सकते हैं।
प्रत्यक्ष सहभागिता में साधक स्वयं संकल्प लेकर पितरों का स्मरण कर सकता है। स्थान और समय की पुष्टि पहले WhatsApp द्वारा करना उचित रहेगा।
किन लोगों के लिए यह पूजन रखा गया है?
- यह धार्मिक आयोजन उन श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी हो सकता है, जो पितरों के निमित्त विधिपूर्वक पूजा करवाना चाहते हैं।
- यदि परिवार में लंबे समय से धार्मिक रूप से पितृ शांति का अनुष्ठान नहीं हुआ है, तब भी इस अवसर पर संकल्प लिया जा सकता है।
- ज्योतिषीय कुंडली में पितृ दोष या श्रापित दोष बताए जाने पर भी व्यक्ति अपनी आस्था के अनुसार यह पूजन करवा सकता है।
पूजन के दिन क्या करें?
- पूजन के दिन सात्त्विकता बनाए रखें। संभव हो तो प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- अपने पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें। सामर्थ्य अनुसार अन्नदान, गौसेवा या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराया जा सकता है।
- परिवार के बुजुर्गों का सम्मान और उनकी सेवा भी पितृ स्मरण की भावना को सार्थक बनाती है।
DivyayogAshram में बुकिंग कैसे करें?
पितृ और श्रापित दोष निवारण पूजन के लिए पहले से संपर्क करके अपना स्थान सुनिश्चित करें।
दिनांक: 10 अक्टूबर 2026
अवसर: सर्व पित्री अमावस्या
पूजन: पितृ और श्रापित दोष निवारण पूजन
माध्यम: Online / Offline
आयोजक: DivyayogAshram
Call / WhatsApp: 7710812329
बुकिंग के समय अपना नाम, गोत्र और पूजन संकल्प संबंधी जानकारी तैयार रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या यह पूजन Online करवाया जा सकता है?
हाँ। DivyayogAshram द्वारा उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार Online सहभागिता की जा सकती है। बुकिंग से पहले प्रक्रिया की पुष्टि करें।
क्या Offline आकर भी पूजा कर सकते हैं?
हाँ। उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार आश्रम में प्रत्यक्ष सहभागिता की जा सकती है। समय और स्थान पहले confirm करें।
गोत्र मालूम न हो तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में बुकिंग के समय DivyayogAshram से उचित संकल्प प्रक्रिया के बारे में जानकारी लें।
क्या पूरे परिवार के लिए संकल्प लिया जा सकता है?
परिवार के लिए सामूहिक संकल्प की व्यवस्था के विषय में बुकिंग के समय जानकारी प्राप्त करें।
इस पूजन से क्या उद्देश्य रखा जाता है?
पितृ शांति, वंश कल्याण, पारिवारिक सुख, सुरक्षा और आर्थिक उन्नति की प्रार्थना इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
क्या पूजा से निश्चित परिणाम मिलता है?
धार्मिक पूजन आस्था और आध्यात्मिक परंपरा का विषय है। किसी विशेष आर्थिक, पारिवारिक या अन्य परिणाम की गारंटी नहीं दी जा सकती।
बुकिंग के लिए कहां संपर्क करें?
Call / WhatsApp: 7710812329 पर DivyayogAshram से संपर्क किया जा सकता है।






