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Bhanu Saptami Ritual Strengthens Confidence Health & Life Direction

भानु सप्तमी – सूर्य कृपा से स्वास्थ्य, तेज और भाग्य जागरण का श्रेष्ठ दिन

Bhanu Saptami Ritual भारतीय पंचांग में कुछ तिथियां केवल कैलेंडर की गणना नहीं होतीं, बल्कि जीवन की ऊर्जा को संतुलित करने का अवसर होती हैं। भानु सप्तमी ऐसी ही एक विशेष तिथि है, जिसे सूर्य तत्व से जुड़ा अत्यंत प्रभावशाली दिन माना गया है। यह दिन स्वास्थ्य, आत्मबल, तेज और जीवन दिशा को मजबूत करने से जुड़ा है।

आज के समय में व्यक्ति शारीरिक रूप से थका हुआ है और मानसिक रूप से भ्रमित। आत्मविश्वास की कमी, निर्णय में कमजोरी, बार बार असफलता और ऊर्जा की कमी आम समस्या बन चुकी है। इन सभी समस्याओं का एक गहरा संबंध सूर्य तत्व से माना गया है।

DivyayogAshram के अनुभव में भानु सप्तमी के दिन श्रद्धा और सही विधि से किया गया छोटा सा साधनात्मक प्रयास भी व्यक्ति के जीवन में स्पष्ट सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।


Bhanu Saptami Ritual – अर्थ और महत्व

भानु शब्द सूर्य का पर्याय है और सप्तमी तिथि सूर्य तत्व से गहरे रूप से जुड़ी मानी जाती है। जब सप्तमी तिथि रविवार को आती है, तब उसे भानु सप्तमी कहा जाता है।

यह संयोग सूर्य की शक्ति को विशेष रूप से सक्रिय करता है।

  • आत्मबल को जाग्रत करता है
  • तेज और ओज में वृद्धि करता है
  • स्वास्थ्य और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करता है

इसी कारण शास्त्रों में भानु सप्तमी को सूर्य उपासना के लिए सर्वोत्तम दिन बताया गया है।


सूर्य तत्व और जीवन का संबंध

सूर्य केवल ग्रह नहीं है, बल्कि जीवन शक्ति का स्रोत है। शरीर की गर्मी, आंखों की रोशनी, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता सूर्य तत्व से जुड़ी मानी जाती है।

जब सूर्य तत्व कमजोर होता है, तब

  • आत्मविश्वास गिरता है
  • निर्णय क्षमता कमजोर होती है
  • शरीर में थकान बनी रहती है
  • जीवन में दिशा स्पष्ट नहीं रहती

भानु सप्तमी सूर्य तत्व को संतुलित और जाग्रत करने का अवसर देती है।


Bhanu Saptami Ritual – किन लोगों के लिए विशेष उपयोगी है

DivyayogAshram के अनुसार यह दिन विशेष रूप से उपयोगी माना गया है

  • जिनका आत्मविश्वास कमजोर रहता है
  • जो बार बार थकान और आलस्य महसूस करते हैं
  • जिनके कार्यों में स्थिरता नहीं आती
  • जो नेतृत्व या सरकारी क्षेत्र से जुड़े हैं
  • जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर माना जाता है

यह दिन केवल ज्योतिषीय दोष के लिए नहीं, बल्कि जीवन शक्ति को जाग्रत करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।


भानु सप्तमी का उपयुक्त मुहूर्त

इस दिन पूरे दिन सूर्य उपासना की जा सकती है, पर कुछ समय विशेष रूप से प्रभावी माने गए हैं।

श्रेष्ठ समय

  • सूर्योदय से प्रातः 10 बजे तक
  • विशेष रूप से सूर्योदय के समय किया गया जप अत्यंत प्रभावी माना जाता है

यदि पूरा समय न मिले, तो भी इस अवधि में किया गया छोटा प्रयास लाभकारी होता है।


साधना से पहले आवश्यक मानसिक स्थिति

सूर्य साधना बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और स्वीकार से जुड़ी होती है।

साधना से पहले

  • मन में हीन भावना न रखें
  • स्वयं को कमजोर न मानें
  • साधना को अहंकार बढ़ाने का माध्यम न बनाएं

DivyayogAshram मानता है कि सूर्य तत्व तब फल देता है, जब व्यक्ति स्वयं को स्वीकार करता है।


भानु सप्तमी का सूर्य मंत्र

यह मंत्र सरल है और सभी आयु वर्ग के लिए उपयुक्त माना गया है।

मंत्र:
ॐ घृणि सूर्याय नमः

इस मंत्र का जप सूर्य तत्व को जाग्रत करने और आत्मबल बढ़ाने के लिए किया जाता है।


भानु सप्तमी पूजन और साधना विधि

आवश्यक सामग्री

  • तांबे का लोटा
  • स्वच्छ जल
  • लाल फूल
  • दीपक
  • लाल वस्त्र

विधि

  1. भानु सप्तमी के दिन सूर्योदय से पहले उठें।
  2. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  3. पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों।
  4. तांबे के लोटे में जल भरें।
  5. सूर्य को अर्घ्य देते हुए मंत्र का 11 या 21 बार जप करें।
  6. कुछ क्षण आंख बंद कर सूर्य की किरणों का ध्यान करें।
  7. मन ही मन आत्मबल और स्पष्टता की कामना करें।

पूरी प्रक्रिया सरल है और लगभग 15 से 20 मिनट में पूर्ण हो जाती है।


भानु सप्तमी के प्रमुख लाभ

1. आत्मविश्वास में वृद्धि

व्यक्ति स्वयं पर भरोसा महसूस करता है।

2. मानसिक स्पष्टता

निर्णय लेने में भ्रम कम होता है।

3. स्वास्थ्य में सुधार

ऊर्जा और सक्रियता बढ़ती है।

4. आंखों की शक्ति में सहायक

नेत्र संबंधी कमजोरी में सहायक माना गया है।

5. नेतृत्व क्षमता

नेतृत्व और प्रभावशीलता बढ़ती है।

6. सरकारी कार्यों में सहूलियत

अटके कार्यों में गति आने लगती है।

7. सम्मान में वृद्धि

समाज और कार्यक्षेत्र में मान बढ़ता है।

8. आत्मसम्मान

हीन भावना में कमी आती है।

9. आलस्य में कमी

शरीर और मन सक्रिय रहते हैं।

10. पिता से संबंध में सुधार

पितृ तत्व संतुलित होता है।

11. करियर में स्थिरता

कार्य में निरंतरता आती है।

12. सकारात्मक दृष्टि

जीवन के प्रति आशावाद बढ़ता है।

13. निर्णय शक्ति

जोखिम लेने की क्षमता विकसित होती है।

14. तेज और ओज

चेहरे और व्यक्तित्व में तेज दिखाई देता है।

15. दीर्घकालिक जीवन शक्ति

सूर्य तत्व के संतुलन से स्थायित्व आता है।


परिणाम कब दिखाई देते हैं

यह साधना तात्कालिक चमत्कार नहीं है।
पर

  • कुछ दिनों में मन का बदलाव
  • कुछ सप्ताह में ऊर्जा में वृद्धि
  • कुछ महीनों में जीवन दिशा में स्पष्टता

देखी जाती है।

DivyayogAshram के अनुभव में निरंतरता और श्रद्धा सबसे बड़ा रहस्य है।


भानु सप्तमी को लेकर सामान्य शंकाएं

क्या यह केवल रविवार को ही होती है

हां, सप्तमी तिथि जब रविवार को आती है, तभी भानु सप्तमी होती है।

क्या केवल एक बार करना पर्याप्त है

हर भानु सप्तमी पर किया गया साधनात्मक प्रयास लाभकारी माना जाता है।

क्या यह साधना सभी कर सकते हैं

हां, यह साधना सरल और सुरक्षित है।


एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण

सूर्य साधना का उद्देश्य अहंकार बढ़ाना नहीं है।
इसका उद्देश्य है

  • आत्मसम्मान
  • स्पष्टता
  • और जिम्मेदारी का विकास

DivyayogAshram मानता है कि सशक्त सूर्य वही है, जो विनम्रता के साथ तेज देता है।


अंत मे

भानु सप्तमी केवल एक तिथि नहीं, बल्कि जीवन शक्ति को पुनः जाग्रत करने का अवसर है। इस दिन किया गया सूर्य पूजन और साधना व्यक्ति के भीतर छिपे आत्मबल को जाग्रत करने में सहायक होता है।

DivyayogAshram के अनुभव में भानु सप्तमी उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी रही है, जो जीवन में दिशा, आत्मविश्वास और ऊर्जा की तलाश में हैं।

जब यह साधना श्रद्धा, सरलता और स्वीकार भाव के साथ की जाती है, तब सूर्य कृपा से जीवन में तेज, स्थिरता और स्पष्टता का नया अध्याय आरंभ होता है।


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