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Brahmacharini chalisa paath

दुख दरिद्रता नष्ट करने वाली ब्रह्मचारिणी चालीसा का पाठ करने से देवी ब्रह्मचारिणी की कृपा प्राप्त होती है और भक्त को सुख, समृद्धि, शांति और सम्पत्ति की प्राप्ति में मदद मिलती है। ब्रह्मचारिणी चालीसा के पाठ से दुर्गंध, दरिद्रता, रोग, दुःख, भय और संकटों का नाश होता है और भक्त को सफलता और समृद्धि में सहायता प्रदान करती है।

ब्रह्मचारिणी चालीसा के पाठ से भक्त का मन शांत होता है और उसे आत्म-विश्वास मिलता है। यह चालीसा भक्त को दुर्गंध, दरिद्रता, रोग, दुःख, भय और संकटों से बचाने में मदद करती है और उसे आने वाले समय में सुरक्षित रखती है।

ब्रह्मचारिणी चालीसा

जय ब्रह्मचारिणी माँ, सुंदर व्रतधारिणी। करो कृपा विश्वमोहिनी॥

कर्म सफल करो, दुख निवारो, भक्ति और शक्ति दो वारण हारिणी॥

अनेक जन्मों की तपस्या का फल तुमने पाया, भक्तों का मन तुम्हारी शक्ति से भाया॥

कौशल कुंडल शोभित नासाग्रे मोती, मृगमदा को भाग्यवान करती संपति॥

सुंदर मुख तिलक चंदन, उर धारि विद्याधर, चरण कमल धरत शीश, चरण कमल धरत शीश॥

रत्न चतुर्दश-बिस्व मोहिनी, विलसत कानन तार, विचित्र मनि निखरत जिमि अवद्य कुण्डल नारी॥

या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

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