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Five Holashtak Mistakes That Can Ruin Your Life

होलाष्टक में ये 5 गलतियां जीवन बिगाड़ सकती हैं सावधानी, संयम और सही समझ का महत्व

होलाष्टक फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक के आठ दिनों का समय है। इस अवधि को परंपरा में संयम और सावधानी का समय माना गया है। कई लोग इसे केवल एक मान्यता समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ लोग अनावश्यक भय भी पाल लेते हैं।

सच्चाई यह है कि होलाष्टक का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि आत्मचिंतन कराना है। यह वह समय है जब व्यक्ति को अपने निर्णयों, व्यवहार और भावनाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

DivyayogAshram के अनुभव में यह देखा गया है कि होलाष्टक के दिनों में की गई कुछ गलतियां आने वाले समय में बाधा और असंतुलन का कारण बन सकती हैं। इसलिए इन दिनों को समझदारी और संतुलन के साथ जीना आवश्यक है।


होलाष्टक का वास्तविक अर्थ

होलाष्टक का अर्थ है आठ दिन की तैयारी। यह होली के उत्सव से पहले आत्मशुद्धि का समय है।

इन दिनों

  • मन अधिक संवेदनशील रहता है
  • निर्णयों का प्रभाव गहरा होता है
  • भावनाएं तीव्र होती हैं

इसलिए यह समय जल्दबाजी से बचने और स्वयं को स्थिर करने का अवसर है।


पहली गलती: बड़े निर्णय लेना

होलाष्टक के दौरान विवाह, नया व्यापार या बड़ी खरीदारी जैसे निर्णय टालने की परंपरा है।

इसका कारण यह नहीं कि यह समय अशुभ है, बल्कि यह समय भावनात्मक रूप से अस्थिर हो सकता है।

जल्दबाजी में लिया गया निर्णय आगे चलकर पछतावा बन सकता है।

DivyayogAshram सलाह देता है कि इन दिनों योजना बनाएं, पर अंतिम निर्णय बाद में लें।


दूसरी गलती: क्रोध और विवाद बढ़ाना

  • इन दिनों मन जल्दी प्रतिक्रिया देता है।
  • यदि व्यक्ति छोटी बात पर भी क्रोध कर लेता है, तो संबंधों में दरार आ सकती है।
  • होलाष्टक संयम का अभ्यास है। यदि इन दिनों विवाद बढ़ाया जाए, तो उसका असर लंबे समय तक रह सकता है।

तीसरी गलती: नकारात्मक सोच में डूबना

  • कुछ लोग होलाष्टक को डर से जोड़ लेते हैं। वे हर घटना को अशुभ मानने लगते हैं।
  • यह सोच स्वयं बाधा बन जाती है।
  • होलाष्टक आत्मसुधार का समय है, भय का नहीं।

चौथी गलती: आध्यात्मिक अभ्यास की अनदेखी

  • यह समय जप, ध्यान और आत्मचिंतन के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
  • यदि व्यक्ति इस अवसर को केवल मनोरंजन या व्यस्तता में खो देता है, तो वह आत्मसंतुलन का अवसर खो देता है।

पांचवीं गलती: संकल्प न लेना

  • होलाष्टक होली की तैयारी है। यदि इन दिनों कोई संकल्प न लिया जाए, तो होली केवल उत्सव रह जाती है।
  • संकल्प के बिना परिवर्तन अधूरा रहता है।
  • DivyayogAshram के अनुसार होलाष्टक का सार है आत्ममंथन और संकल्प।

होलाष्टक में क्या करें

आत्मचिंतन

प्रतिदिन कुछ समय स्वयं के साथ बिताएं।

जप

सरल मंत्र का जप करें।

मंत्र:
ॐ नमः शिवाय

मंत्र का अर्थ

  • ॐ चेतना का स्वर
  • नमः समर्पण
  • शिवाय कल्याण

यह मंत्र मन को स्थिर करता है।


होलाष्टक के लिए सरल विधि

  • प्रातः या संध्या समय शांत बैठें।
  • दीपक जलाएं।
  • 108 बार मंत्र जप करें।
  • अपने दोष और आदतों पर विचार करें।
  • सुधार का संकल्प लें।

पूरी प्रक्रिया 20 मिनट में पूर्ण हो सकती है।


होलाष्टक में सावधानी का मुहूर्त

होलाष्टक फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से प्रारंभ होता है और पूर्णिमा तक रहता है।

इन आठ दिनों में

  • संयम रखें
  • बड़े निर्णय टालें
  • मन को संतुलित रखें

होलाष्टक के प्रमुख लाभ यदि सही ढंग से जिया जाए

1. आत्मचिंतन की आदत

व्यक्ति स्वयं को समझने लगता है।

2. निर्णय क्षमता में सुधार

जल्दबाजी कम होती है।

3. मानसिक शांति

मन हल्का महसूस करता है।

4. संबंधों में सुधार

विवाद कम होते हैं।

5. संकल्प शक्ति

लक्ष्य स्पष्ट होते हैं।

6. नकारात्मक सोच में कमी

मन अधिक सकारात्मक बनता है।

7. ऊर्जा संतुलन

थकान कम महसूस होती है।

8. धैर्य

प्रतिक्रिया देने से पहले सोचने की आदत बनती है।

9. आध्यात्मिक जुड़ाव

भीतर शांति का अनुभव होता है।

10. अनुशासन

दिनचर्या बेहतर होती है।

11. आत्मविश्वास

स्वयं पर भरोसा बढ़ता है।

12. भय में कमी

अंधविश्वास से मुक्ति मिलती है।

13. सकारात्मक शुरुआत

होली का उत्सव नई ऊर्जा देता है।

14. संतुलित जीवन

मन और कर्म में तालमेल आता है।

15. दीर्घकालिक स्थिरता

आने वाले समय में कम बाधाएं आती हैं।


होलाष्टक का वास्तविक संदेश

होलाष्टक डराने के लिए नहीं है। यह सावधान करने के लिए है।

यदि इन दिनों संयम और आत्मचिंतन रखा जाए, तो यह समय जीवन में गहरा परिवर्तन ला सकता है।

DivyayogAshram मानता है कि यह आठ दिन स्वयं को सुधारने और नई शुरुआत की तैयारी का अवसर हैं।


अंत मे

होलाष्टक में की गई पांच गलतियां जीवन को असंतुलित कर सकती हैं। पर यदि इन्हीं दिनों को आत्मसुधार और संकल्प के लिए उपयोग किया जाए, तो वही समय जीवन को नई दिशा भी दे सकता है।

होलाष्टक का अर्थ रोकना नहीं, बल्कि सोच समझकर आगे बढ़ना है।

DivyayogAshram के अनुसार जब व्यक्ति संयम, धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ इन आठ दिनों को जीता है, तब होली का उत्सव केवल रंगों का नहीं, बल्कि भीतर के परिवर्तन का उत्सव बन जाता है।


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