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पुस्तक यक्षिणी / Pustaka Yakshini Mantra

ज्ञान व बुद्धि का विकास करने वाली पुस्तक यक्षिणी एक प्रमुख यक्षिणी हैं जिन्हें पुस्तकों का स्वामिनी माना जाता है। इनकी साधना एवं उपासना का मुख्य उद्देश्य ज्ञान एवं विद्या की प्राप्ति होती है। पुस्तक यक्षिणी के उपासना से विद्यार्थी अपने अध्ययन में सफलता प्राप्त करते हैं और ज्ञान की वृद्धि होती है। पुस्तक यक्षिणी की उपासना के लिए विशेष मंत्र और पूजन विधि होती है। यह यक्षिणी विशेष रूप से विद्यार्थियों और ज्ञान के अभ्यासकों के लिए मानी जाती है जो ज्ञान एवं विद्या में उन्नति की कामना करते हैं।

पुस्तक यक्षिणी का मंत्र:

|| ॐ ह्रीं पुस्तक यक्षिण्यै स्वाहा ||

पुस्तक यक्षिणी लाभ:

  1. ज्ञान और विद्या में वृद्धि होती है।
  2. अध्ययन के समय में समझ और ध्यान में सुधार होता है।
  3. परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने में मदद मिलती है।
  4. ज्ञान की भूमिका में उन्नति होती है।
  5. शिक्षा और पढ़ाई में आत्मविश्वास और सहायता मिलती है।

Benefits of Pustaka Yakshini:

  1. Attainment of knowledge and wisdom.
  2. Improvement in understanding and focus during studies.
  3. Assistance in achieving success in examinations.
  4. Progression in the field of education and learning.
  5. Boost in self-confidence and support in education.

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