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Shiva Water Abhishek Ritual On Mahashivratri For Health

रोग से मुक्ति पाना हैं महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का जलाभिषेक इस तरह करें

Shiva Water Abhishek Ritual रोग केवल शरीर की समस्या नहीं होते। वे मन, भाव और जीवनशैली से भी जुड़े होते हैं। आज बहुत से लोग दवाइयां लेते हैं, जांच करवाते हैं, फिर भी रोग बार बार लौट आता है। कहीं न कहीं मन में डर, तनाव और असंतुलन बना रहता है। ऐसे में शरीर पूरी तरह स्वस्थ होने में समय लेता है।

भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में स्वास्थ्य को केवल उपचार का विषय नहीं माना गया। इसे संतुलन का परिणाम माना गया है। जब मन शांत होता है और चेतना स्थिर होती है, तब शरीर में भी सुधार आने लगता है। महाशिवरात्रि ऐसा दिव्य अवसर है, जब शिव तत्व सबसे अधिक सक्रिय माना गया है।

DivyayogAshram के अनुभव में महाशिवरात्रि पर श्रद्धा और सही विधि से किया गया शिवलिंग का जलाभिषेक रोग से मुक्ति की प्रक्रिया को गहराई से सहारा देता है।


शिव तत्व और स्वास्थ्य का संबंध

भगवान शिव को वैद्यनाथ कहा गया है। वे केवल तप और त्याग के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि संतुलन और उपचार की चेतना भी हैं।

शिव का अर्थ है कल्याण।
जहां मन अशांत होता है, वहां रोग टिकते हैं।
जहां भय और तनाव होता है, वहां शरीर कमजोर पड़ता है।

शिव तत्व मन को स्थिर करता है। जब मन स्थिर होता है, तब शरीर में सुधार की प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से शुरू होती है।


रोग क्यों लंबे समय तक बने रहते हैं

कई रोग केवल शारीरिक कारणों से नहीं बढ़ते। उनके पीछे कुछ गहरे कारण भी होते हैं।

मानसिक कारण

  • लगातार तनाव
  • भय और चिंता
  • रोग को लेकर अत्यधिक डर
  • नकारात्मक सोच

जीवनशैली के कारण

  • अनियमित दिनचर्या
  • नींद की कमी
  • भीतर दबा हुआ भावनात्मक बोझ

चेतना का असंतुलन

  • स्वयं को असहाय मान लेना
  • निराशा में जीना
  • भविष्य को लेकर भय

DivyayogAshram मानता है कि जब इन कारणों पर काम किया जाता है, तभी जलाभिषेक का प्रभाव गहराई तक पहुंचता है।


महाशिवरात्रि का विशेष महत्व

महाशिवरात्रि को शिव और चेतना के मिलन की रात्रि कहा गया है। यह वह समय है, जब मन स्वाभाविक रूप से अंतर्मुखी होता है और ध्यान आसानी से टिकता है।

इस रात्रि

  • प्रार्थना गहरी होती है
  • संकल्प अधिक प्रभावी बनते हैं
  • मन में स्थिरता आती है

इसी कारण शास्त्रों में महाशिवरात्रि को रोग निवारण और आत्मशुद्धि के लिए श्रेष्ठ माना गया है।


शिवलिंग का जलाभिषेक क्यों प्रभावी माना गया है

जल जीवन का प्रतीक है। शिवलिंग चेतना का प्रतीक है। जब जल और शिवलिंग का मिलन होता है, तब जीवन और चेतना का संतुलन स्थापित होता है।

जलाभिषेक का उद्देश्य

  • शरीर के रोग नहीं, रोग का कारण शांत करना
  • मन के बोझ को हल्का करना
  • स्वयं के प्रति करुणा जाग्रत करना

DivyayogAshram के अनुसार नियमित और भावपूर्ण जलाभिषेक रोग से लड़ने की आंतरिक शक्ति को बढ़ाता है।


महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक का उपयुक्त मुहूर्त

महाशिवरात्रि की पूरी रात्रि जलाभिषेक के लिए शुभ मानी जाती है।

श्रेष्ठ समय

  • संध्या काल के बाद
  • रात्रि का मध्य भाग
  • ब्रह्म मुहूर्त भी लाभकारी माना गया है

यदि पूरी रात जागना संभव न हो, तो भी शांत रात्रि में किया गया जलाभिषेक प्रभावी रहता है।


जलाभिषेक से पहले आवश्यक मानसिक तैयारी

इस साधना में भाव सबसे महत्वपूर्ण है।

जलाभिषेक से पहले

  • रोग को लेकर भय छोड़ें
  • स्वयं को दोष देना बंद करें
  • शरीर के प्रति कृतज्ञता रखें
  • उपचार के साथ संतुलन का भाव रखें

DivyayogAshram मानता है कि जब व्यक्ति स्वयं के प्रति दयालु होता है, तभी उपचार गहराता है।


शिवलिंग जलाभिषेक का मंत्र

यह मंत्र सरल है और सभी के लिए उपयुक्त माना गया है।

मंत्र:
ॐ नमः शिवाय


अर्थ

  • चेतना का मूल स्वर
  • नमः समर्पण और अहंकार का त्याग
  • शिवाय कल्याण और संतुलन का भाव

मंत्र का अर्थ समझकर जप करने से उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।


महाशिवरात्रि पर शिवलिंग जलाभिषेक की विधि

आवश्यक सामग्री

  • शिवलिंग या शिव का चित्र
  • स्वच्छ जल
  • बेलपत्र
  • दीपक
  • शांत स्थान

विधि

  1. महाशिवरात्रि के दिन स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. शांत स्थान पर शिवलिंग स्थापित करें।
  3. दीपक जलाएं और कुछ क्षण मौन रखें।
  4. शिवलिंग पर धीरे धीरे जल अर्पित करें।
  5. जल अर्पण के साथ मंत्र का 108 बार जप करें।
  6. जप के बाद अपने रोग से मुक्ति का संकल्प करें।
  7. अंत में शिव से स्वास्थ्य और धैर्य की प्रार्थना करें।

पूरी प्रक्रिया लगभग 25 से 30 मिनट में पूर्ण हो जाती है।


जलाभिषेक के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें

  • जल बहुत तेज न डालें
  • मन को शांत रखें
  • जल्दी में प्रक्रिया न करें
  • रोग को लेकर भय न बढ़ाएं

जलाभिषेक धैर्य और स्थिरता का अभ्यास है।


इस साधना से मिलने वाले प्रमुख लाभ

1. मानसिक शांति

मन का तनाव कम होता है।

2. भय में कमी

रोग को लेकर डर कमजोर पड़ता है।

3. आत्मविश्वास

स्वस्थ होने का भरोसा बढ़ता है।

4. नींद में सुधार

मन शांत होने से नींद बेहतर होती है।

5. उपचार में सहयोग

चिकित्सकीय उपचार का असर बढ़ता है।

6. नकारात्मक सोच में कमी

मन अधिक सकारात्मक बनता है।

7. धैर्य

रोग से लड़ने की शक्ति आती है।

8. आत्मस्वीकृति

शरीर को दोष देना कम होता है।

9. भावनात्मक संतुलन

भीतर का बोझ हल्का पड़ता है।

10. ऊर्जा में सुधार

थकान में कमी महसूस होती है।

11. ध्यान की क्षमता

मन इधर उधर नहीं भटकता।

12. जीवन के प्रति आशा

निराशा कमजोर पड़ती है।

13. आध्यात्मिक जुड़ाव

शिव तत्व से संबंध गहरा होता है।

14. परिवार में सकारात्मकता

घर का वातावरण शांत होता है।

15. दीर्घकालिक स्वास्थ्य संतुलन

रोग से मुक्ति की प्रक्रिया स्थिर होती है।


रोग से मुक्ति का वास्तविक अर्थ

इस साधना का अर्थ यह नहीं कि रोग रातों रात समाप्त हो जाए।
इसका अर्थ है

  • रोग से लड़ने की आंतरिक शक्ति
  • मन और शरीर का संतुलन
  • उपचार के प्रति सकारात्मक दृष्टि

DivyayogAshram के अनुसार जब मन स्थिर होता है, तब शरीर स्वयं सुधार की दिशा पकड़ता है।


सामान्य शंकाएं

क्या यह जलाभिषेक सभी कर सकते हैं

हां। यह सरल और सुरक्षित साधना है।

क्या दवा बंद कर देनी चाहिए

नहीं। यह साधना उपचार का सहारा है, विकल्प नहीं।

क्या तुरंत परिणाम मिलते हैं

परिणाम धीरे धीरे स्पष्ट होते हैं, पर स्थायी होते हैं।


एक आवश्यक समझ

शिव साधना का उद्देश्य रोग से लड़ना नहीं है।
इसका उद्देश्य है

  • स्वयं को संतुलित करना
  • भय को शांत करना
  • उपचार को गहराई देना

जब यह होता है, तब रोग अपने आप कमजोर होने लगता है।

BOOK PUJAN SHIVIR


अंत मे

रोग से मुक्ति केवल दवाइयों से नहीं, संतुलन से आती है। महाशिवरात्रि पर किया गया शिवलिंग का जलाभिषेक इस संतुलन को स्थापित करने का दिव्य माध्यम है।

DivyayogAshram के अनुभव में यह साधना उन लोगों के लिए विशेष रूप से सहायक रही है, जो लंबे समय से रोग, भय और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे।

जब यह जलाभिषेक श्रद्धा, धैर्य और सही समझ के साथ किया जाता है, तब शिव कृपा से मन स्थिर होता है और शरीर में स्वस्थ होने की प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से तेज होने लगती है।


BOOK - 21-22 FEB. 2025- BAGALAMUKHI SADHANA SHIVIR AT DIVYAYOGA ASHRAM (ONLINE/ OFFLINE)

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