श्री विश्वकर्मा जयंती – सृजन, कौशल और कर्म शक्ति को जाग्रत करने का दिव्य पर्व
Shri Vishvakarma Jayanti हर व्यक्ति के जीवन में कुछ ऐसा होता है, जिसे वह अपने हाथों, बुद्धि और कौशल से बनाना चाहता है। कोई व्यवसाय खड़ा करना चाहता है, कोई मशीनों से जुड़ा काम करता है, कोई कला, शिल्प या निर्माण से जुड़ा होता है। पर कई बार मेहनत करने के बाद भी स्थिरता नहीं आती, काम आगे नहीं बढ़ता और आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है।
भारतीय परंपरा में ऐसे सभी कर्मों के अधिष्ठाता देव भगवान विश्वकर्मा माने गए हैं। उन्हें सृष्टि का प्रथम शिल्पकार, अभियंता और निर्माता कहा गया है। श्री विश्वकर्मा जयंती केवल एक पूजा का दिन नहीं, बल्कि कर्म, कौशल और सृजन शक्ति को सम्मान देने का पर्व है।
DivyayogAshram के अनुभव के अनुसार इस दिन श्रद्धा और सही विधि से किया गया पूजन व्यक्ति के कार्य, व्यवसाय और जीवन दिशा में स्थिरता और स्पष्टता लाने में सहायक होता है।
भगवान विश्वकर्मा का आध्यात्मिक स्वरूप
भगवान विश्वकर्मा को केवल औजारों और मशीनों से जोड़कर देखना सीमित दृष्टि है। वे उस चेतना के प्रतीक हैं, जो विचार को आकार देती है और कल्पना को वास्तविकता में बदलती है।
उनका स्वरूप यह सिखाता है कि
- कर्म में शुद्धता हो
- कार्य में अनुशासन हो
- सृजन में अहंकार न हो
जब व्यक्ति अपने काम को केवल कमाई नहीं, बल्कि साधना मानकर करता है, तब विश्वकर्मा तत्व सक्रिय होता है।
श्री विश्वकर्मा जयंती का महत्व
श्री विश्वकर्मा जयंती हर उस व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है, जो
- व्यवसाय करता है
- निर्माण या तकनीकी क्षेत्र से जुड़ा है
- कारीगर, शिल्पकार या कलाकार है
- मशीन, औजार या वाहन से कार्य करता है
यह दिन कर्म और साधन दोनों को शुद्ध करने का अवसर देता है।
DivyayogAshram मानता है कि जिस दिन हम अपने काम को सम्मान देते हैं, उसी दिन काम हमें सम्मान देना शुरू करता है।
विश्वकर्मा जयंती का उपयुक्त मुहूर्त
विश्वकर्मा जयंती प्रायः कन्या संक्रांति के आसपास मनाई जाती है। इस दिन पूरे दिन पूजन किया जा सकता है, पर कुछ समय विशेष रूप से शुभ माने गए हैं।
श्रेष्ठ मुहूर्त
- प्रातः काल
- सूर्योदय के बाद से दोपहर तक
- कार्य आरंभ करने से पहले का समय
यदि पूरे विधि विधान से पूजन संभव न हो, तो भी इस दिन अपने कार्य स्थान पर दीपक जलाना लाभकारी माना गया है।
पूजन से पहले आवश्यक मानसिक स्थिति
विश्वकर्मा पूजन केवल सामग्री से नहीं, बल्कि भाव से फल देता है।
पूजन से पहले
- अपने काम के प्रति नकारात्मक सोच न रखें
- स्वयं को असफल न मानें
- दूसरों से तुलना न करें
DivyayogAshram के अनुसार जब व्यक्ति अपने कर्म को स्वीकार करता है, तभी उसमें सुधार आता है।
श्री विश्वकर्मा का मंत्र
यह मंत्र सरल है और सभी कार्यक्षेत्र के लोगों के लिए उपयुक्त माना गया है।
मंत्र:
ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः
इस मंत्र का जप कर्म शुद्धि, कार्य सफलता और सृजन शक्ति के लिए किया जाता है।
श्री विश्वकर्मा जयंती पूजन विधि
आवश्यक सामग्री
- भगवान विश्वकर्मा का चित्र या प्रतीक
- दीपक
- पुष्प
- अक्षत
- मिठाई या फल
- अपने कार्य से जुड़े औजार या साधन
विधि
- जयंती के दिन स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- अपने कार्य स्थल को साफ करें।
- भगवान विश्वकर्मा का चित्र स्थापित करें।
- दीपक जलाएं और पुष्प अर्पित करें।
- मंत्र का 11 या 21 बार जप करें।
- अपने औजारों या मशीनों पर हल्का पुष्प अर्पित करें।
- मन ही मन कार्य में शुद्धता और सफलता की कामना करें।
पूजन के बाद अपने काम को शांत भाव से करें।
विश्वकर्मा जयंती पर क्या न करें
- अपने काम को छोटा न समझें
- मशीनों या औजारों के प्रति लापरवाही न करें
- क्रोध या अधीरता में निर्णय न लें
यह दिन संयम और सम्मान का है।
श्री विश्वकर्मा जयंती के प्रमुख लाभ
1. कार्य में स्थिरता
काम में बार बार आने वाली रुकावट कम होती है।
2. व्यवसाय में प्रगति
धीरे धीरे विकास के नए अवसर बनते हैं।
3. कर्म शुद्धि
कार्य से जुड़ी नकारात्मकता कम होती है।
4. आत्मविश्वास
अपने कौशल पर भरोसा बढ़ता है।
5. निर्णय क्षमता
व्यावहारिक और सही निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
6. मशीन और साधनों की सुरक्षा
दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है।
7. कार्य स्थल की सकारात्मक ऊर्जा
काम करने का वातावरण बेहतर बनता है।
8. सम्मान में वृद्धि
कार्यक्षेत्र में पहचान और मान बढ़ता है।
9. आर्थिक स्थिरता
आय में धीरे धीरे स्थिरता आती है।
10. कौशल में निखार
नई चीजें सीखने की इच्छा बढ़ती है।
11. मेहनत का फल
परिश्रम का परिणाम दिखाई देने लगता है।
12. तनाव में कमी
काम का दबाव बोझ नहीं लगता।
13. सहयोग में वृद्धि
टीम या सहकर्मियों का सहयोग बढ़ता है।
14. दीर्घकालिक सफलता
क्षणिक लाभ के बजाय स्थायी प्रगति होती है।
15. कर्म के प्रति सम्मान
काम साधना जैसा अनुभव होने लगता है।
परिणाम कब दिखाई देते हैं
विश्वकर्मा पूजन कोई तात्कालिक चमत्कार नहीं है।
पर
- कुछ दिनों में मन का बदलाव
- कुछ सप्ताह में कार्य में सुधार
- कुछ महीनों में स्थिर प्रगति
देखी जाती है।
DivyayogAshram के अनुभव के अनुसार जो व्यक्ति नियमित रूप से अपने कर्म को सम्मान देता है, उसके जीवन में अव्यवस्था टिक नहीं पाती।
श्री विश्वकर्मा जयंती से जुड़े सामान्य प्रश्न
क्या यह पूजन केवल कारीगरों के लिए है
नहीं। हर कार्य करने वाला व्यक्ति यह पूजन कर सकता है।
क्या केवल एक दिन पर्याप्त है
यह दिन विशेष है, पर कर्म सम्मान रोज होना चाहिए।
क्या यह पूजन सुरक्षित है
हां। यह पूरी तरह सात्विक और सकारात्मक पूजन है।
कर्म और साधना का संबंध
विश्वकर्मा जयंती यह सिखाती है कि
- काम बोझ नहीं है
- काम ही साधना है
- और साधना से ही स्थिर सफलता आती है
DivyayogAshram मानता है कि जब कर्म में श्रद्धा जुड़ती है, तब भाग्य अपने आप साथ देने लगता है।
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अंत मे
श्री विश्वकर्मा जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि कर्म और कौशल को सम्मान देने का दिन है। इस दिन किया गया पूजन व्यक्ति को अपने काम से जोड़ता है और उसे नई दिशा देता है।
DivyayogAshram के अनुभव में यह पर्व उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी रहा है, जो अपने कार्य में स्थिरता, सम्मान और दीर्घकालिक सफलता चाहते हैं।
जब यह पूजन श्रद्धा, सरलता और ईमानदारी के साथ किया जाता है, तब भगवान विश्वकर्मा की कृपा से कर्म में शक्ति और जीवन में संतुलन आने लगता है।








