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Vijayadashami Sadhana For Victory – Achieve Success & Prosperity in Ten Days

विजयादशमी साधना: 10 दिनों में जीवन में लाएं सफलता

Vijayadashami Sadhana For Victory विजयादशमी जिसे दशहरा भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था और माता दुर्गा ने महिषासुर का संहार कर धर्म की रक्षा की थी।
DivyayogAshram के अनुसार, विजयादशमी साधना का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी बहुत गहरा है। यदि साधक इस दिन विशेष साधना करे तो वह 10 दिनों के भीतर ही सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कर सकता है।


विजयादशमी साधना का महत्व

  • यह दिन नकारात्मक शक्तियों और विघ्न-बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है।
  • इस समय किए गए मंत्र जाप और टोटके तुरंत फल देते हैं।
  • साधना करने से व्यक्ति के आत्मबल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
  • जीवन की रुकावटें और असफलताएँ धीरे-धीरे दूर हो जाती हैं।

विजयादशमी साधना मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं दुर्गायै नमः॥

यह मंत्र शक्ति, सफलता और समृद्धि प्रदान करने वाला है।


साधना विधि (Vidhi)

  1. विजयादशमी की सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. घर या मंदिर में स्वच्छ आसन पर बैठें।
  3. सामने माँ दुर्गा या श्रीराम की प्रतिमा रखें।
  4. दीपक, धूप और पुष्प अर्पित करें।
  5. 108 बार “ॐ ऐं ह्रीं श्रीं दुर्गायै नमः” मंत्र का जाप करें।
  6. साधना के बाद प्रसाद चढ़ाकर परिवार में बांटें।
  7. 10 दिनों तक नियमित यह साधना करने का संकल्प लें।

विजयादशमी साधना के लाभ

  1. जीवन में सफलता और प्रगति।
  2. शत्रुओं पर विजय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा।
  3. मानसिक शांति और आत्मविश्वास की वृद्धि।
  4. परिवार में सुख और सौहार्द।
  5. आर्थिक स्थिति में सुधार।
  6. व्यापार और नौकरी में उन्नति।
  7. संतान सुख और पारिवारिक स्थिरता।
  8. आध्यात्मिक शक्ति और साधना में सिद्धि।
  9. रोग और कष्टों से मुक्ति।
  10. शिक्षा और ज्ञान की प्राप्ति।
  11. घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार।
  12. पितृ कृपा और गुरु कृपा की प्राप्ति।
  13. कठिन कार्यों में सफलता।
  14. इच्छाओं की पूर्ति।
  15. आत्मिक शांति और मोक्ष मार्ग में प्रगति।

विजयादशमी साधना के नियम (Niyam)

  • साधना के दौरान सात्विक आहार लें।
  • नकारात्मक विचारों और क्रोध से दूर रहें।
  • प्रतिदिन एक ही समय पर साधना करें।
  • साधना स्थल को स्वच्छ और पवित्र रखें।
  • साधना काल में शराब, मांस और तमसिक भोजन से बचें।
  • श्रद्धा और विश्वास बनाए रखें।

कौन कर सकता है विजयादशमी साधना?

  • विद्यार्थी जो शिक्षा और परीक्षा में सफलता चाहते हैं।
  • व्यापारी और नौकरीपेशा लोग जो करियर में प्रगति चाहते हैं।
  • गृहस्थ लोग जो परिवार में सुख और समृद्धि चाहते हैं।
  • साधक जो आध्यात्मिक शक्ति और सिद्धि की खोज में हैं।
  • महिलाएं और पुरुष दोनों समान रूप से इस साधना से लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

सामान्य प्रश्न 

Q1. विजयादशमी साधना कब करनी चाहिए?
उत्तर: विजयादशमी के दिन प्रातः और संध्या काल दोनों समय करना श्रेष्ठ है।

Q2. क्या यह साधना घर पर की जा सकती है?
उत्तर: हाँ, यह साधना घर पर भी की जा सकती है, बस स्थान पवित्र होना चाहिए।

Q3. क्या साधना के लिए गुरु आवश्यक है?
उत्तर: सामान्य मंत्र जाप के लिए गुरु अनिवार्य नहीं है, पर गहन साधना के लिए गुरु मार्गदर्शन लाभकारी है।

Q4. कितने दिनों तक साधना करनी चाहिए?
उत्तर: कम से कम 10 दिन, और यदि संभव हो तो 21 या 41 दिन तक।

Q5. क्या महिलाएं भी यह साधना कर सकती हैं?
उत्तर: हाँ, महिलाएं भी पूर्ण श्रद्धा से साधना कर सकती हैं।

Q6. क्या माला का प्रयोग आवश्यक है?
उत्तर: रुद्राक्ष या स्फटिक माला से जप करना उत्तम है, लेकिन बिना माला भी जाप कर सकते हैं।

Q7. क्या यह साधना व्यवसाय में लाभ दिलाती है?
उत्तर: हाँ, यह साधना विशेष रूप से व्यापार और नौकरी में प्रगति देती है।


अंत मे

विजयादशमी साधना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह जीवन को सफलता और सकारात्मकता से भरने का अद्भुत माध्यम है। यदि श्रद्धा, नियम और विधि के साथ इसे 10 दिनों तक किया जाए तो साधक को निश्चित रूप से सफलता, समृद्धि और शांति प्राप्त होती है।
DivyayogAshram का संदेश है कि साधना ही वह माध्यम है जो हमें आत्मिक शक्ति और जीवन की वास्तविक सफलता तक पहुँचाता है।


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