शत्रु से बचाव के लिए गुप्त नवरात्रि में विशेष पूजा विधि
गुप्त नवरात्रि, विशेष रूप से शक्ति और आशीर्वाद प्राप्ति का समय है। इस दौरान किए गए उपाय व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और आत्मिक शक्ति प्रदान करते हैं। इन नवरात्रि में हम न केवल अपनी साधना पर ध्यान केंद्रित करते हैं, बल्कि छुपे शत्रुओं से भी बचाव कर सकते हैं। यह समय षडयंत्रों से रक्षा करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
शत्रु से सुरक्षा के उपाय नवरात्रि में विशेष महत्व रखते हैं। गुप्त नवरात्रि का आयोजन शत्रु से सुरक्षा और मानसिक शांति प्राप्ति के लिए किया जाता है। इस समय किए गए मंत्र जाप, तंत्र साधना और पूजा से शत्रुओं की गतिविधियाँ निष्क्रिय हो जाती हैं और व्यक्ति को शांति मिलती है।
गुप्त नवरात्रि मुहुर्त २०२५
गुप्त नवरात्रि का आयोजन विशेष मुहुर्त में किया जाता है, जो हर साल बदलता है। २०२५ में गुप्त नवरात्रि का शुभ मुहुर्त 30 जनवरी 2025 से शुरू होकर 07 फरवरी 2025 तक रहेगा। इस अवधि में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और विभिन्न व्रत, अनुष्ठान किए जाते हैं। इस मुहुर्थ मे माता बगलामुखी की पूजा शत्रुओं को दूर रखती है। विशेष रूप से इस समय शत्रु नाश के लिए कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं, जैसे मंत्र जाप, हवन, और तंत्र क्रियाएं।
बगलामुखी मंत्र व अर्थ
मंत्र:
ॐ ह्ल्रीं बगलामुखे ह्लीं ॐ स्वाहा
मंत्र का अर्थ:
यह मंत्र देवी बगलामुखी को समर्पित है, जो शत्रुओं से सुरक्षा और उनके षडयंत्रों को नष्ट करने वाली शक्तियों की प्रतीक हैं।
- “ॐ” : यह ब्रह्माण्ड की सर्वोत्तम ध्वनि है, जो सबको शांति और ऊर्जा प्रदान करती है।
- “ह्ल्रीं” : यह बगलामुखी का बीज मंत्र है, जो शत्रु की शक्तियों को नष्ट करने में मदद करता है।
- “बगलामुखे” : यह देवी बगलामुखी का नाम है, जो सभी शत्रुओं को शांति देने वाली हैं।
- “ह्लीं” : यह बीज मंत्र शत्रु नाश और दुश्मनों से सुरक्षा का प्रतीक है।
- “ॐ स्वाहा” : इस मंत्र का समापन है, जो सभी बल और शक्तियों का समर्पण करता है।
नियम
- सच्चे श्रद्धा और विश्वास से जाप करें: बगलामुखी मंत्र का जाप करते समय श्रद्धा और विश्वास होना अत्यंत आवश्यक है।
- नियमितता बनाए रखें: यह मंत्र विशेष रूप से शत्रु नाश के लिए उपयोगी है, इसलिए इसे नियमित रूप से जाप करना चाहिए।
- शुद्ध स्थान पर जाप करें: मंत्र जाप के लिए शांत और शुद्ध स्थान का चयन करें।
- साफ वस्त्र पहनें: पूजा और जाप करते समय स्वच्छ और शांतिपूर्ण अवस्था में रहना चाहिए।
- मौन रहें: मंत्र जाप करते समय शांति बनाए रखें और किसी भी प्रकार के शोर से बचें।
- मालापूजन करें: मंत्र के साथ रुद्राक्ष या सफेद फूलों की माला का प्रयोग करें।
- उच्चारण की शुद्धता: मंत्र का उच्चारण सही तरीके से करना बहुत ज़रूरी है। उच्चारण में कोई गलती नहीं होनी चाहिए।
- सच्चे मन से पूजा करें: यदि आप शत्रु से रक्षा की इच्छा से पूजा कर रहे हैं, तो अपना हृदय और मन शुद्ध रखें।
पूजा विधि (9 दिन)
बगलामुखी पूजा का उद्देश्य शत्रुओं से सुरक्षा प्राप्त करना, उनके षडयंत्रों को विफल करना और जीवन में शांति एवं समृद्धि लाना है। इस पूजा को 9 दिन लगातार किया जाता है और विशेष ध्यान रखना चाहिए कि हर दिन पूजा विधि को सख्ती से पालन किया जाए। यहाँ हम आपको बगलामुखी पूजा की विधि के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे 9 दिन में करना चाहिए।
पहला दिन (प्रारंभिक पूजन):
- स्थान चयन: पूजा के लिए एक शुद्ध और शांत स्थान का चयन करें।
- सर्वप्रथम स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- दीपक और धूपबत्ती जलाएं और बगलामुखी माता की मूर्ति या चित्र को रखें।
- मंत्र जाप शुरू करें: सबसे पहले “ॐ ह्ल्रीं बगलामुखे ह्लीं ॐ स्वाहा” मंत्र २० मिनट तक जाप करें।
- प्रसाद अर्पित करें: शहद और ताजे फल अर्पित करें।
दूसरा से आठवां दिन (मंत्र जाप और पूजा):
- सर्वप्रथम दीपक और धूप जलाएं।
- मंत्र जाप: इस समय प्रतिदिन २० मिनट तक बगलामुखी मंत्र का जाप करें।
- नैवेद्य अर्पित करें: प्रति दिन ताजे फल, मिठाई या शहद का प्रसाद अर्पित करें।
- अखंड दीप जलाएं: पूरे 9 दिन दीप जलाने की प्रक्रिया को जारी रखें।
- शिवलिंग की पूजा करें: माता बगलामुखी के साथ-साथ शिवलिंग की पूजा करना भी अत्यधिक शुभ होता है।
- गायत्री मंत्र का जाप: पूजा के साथ गायत्री मंत्र का भी जाप करें।
- पूजाः इस तरह से ८ दिन पूजा करे
नौवां दिन (पूजन का समापन):
- पूरे 9 दिनों का समापन एक बड़े हवन से करें, जिसमें बगलामुखी मंत्र का जाप करते हुए हवन सामग्री अर्पित की जाए।
- प्रसाद वितरण करें: पूजा के बाद प्रसाद का वितरण करें और पूरे मन से धन्यवाद अर्पित करें।
- मंत्रों का निरंतर जाप करें: समापन के बाद भी कुछ समय तक मंत्र जाप जारी रखें।
- संपूर्ण शांति की कामना करें: अंत में शत्रु से सुरक्षा की कामना करते हुए बगलामुखी माता का धन्यवाद करें।
नोट: पूजा करते समय शांति बनाए रखें और किसी भी प्रकार की हलचल से बचें।
बगलामुखी पूजा के लाभ
- शत्रु नाश: इस पूजा से शत्रुओं का प्रभाव समाप्त होता है और उनके षडयंत्र विफल हो जाते हैं।
- सामाजिक सम्मान में वृद्धि: बगलामुखी पूजा से समाज में सम्मान बढ़ता है और किसी भी प्रकार के आरोप या अपमान से मुक्ति मिलती है।
- आध्यात्मिक उन्नति: यह पूजा व्यक्ति की मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति में मदद करती है।
- व्यक्तिगत सफलता: बगलामुखी की पूजा करने से जीवन में सफलता की राह खुलती है और बाधाएं दूर होती हैं।
- नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा: बगलामुखी पूजा से घर और जीवन में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव समाप्त होता है।
शत्रु से सुरक्षा के उपाय
गुप्त नवरात्रि के दौरान किए गए कुछ उपाय शत्रु से सुरक्षा प्रदान करते हैं। इन उपायों को ध्यानपूर्वक और श्रद्धा से किया जाना चाहिए। आइए जानते हैं कुछ प्रमुख उपायों के बारे में:
- शत्रु नाश के मंत्र
देवी दुर्गा के मंत्रों का जाप करें। विशेष रूप से “ॐ दुं दुर्गायै नमः” का जाप शत्रुओं से रक्षा करने में सहायक होता है। - तंत्र साधना
तंत्र साधना से शत्रु के षडयंत्रों का असर कम किया जा सकता है। - रूद्राक्ष की माला
रूद्राक्ष की माला पहनने से शत्रु की बुरी नजर से बचाव होता है। - हवन और यज्ञ
हवन करने से नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं और देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। - काली मिट्टी की पूजा
काली मिट्टी को घर में रखें और उसकी पूजा करें। इससे घर की सुरक्षा होती है और शत्रु से बचाव मिलता है।
लाभ
- विकार और मानसिक तनाव से मुक्ति
शत्रु की छाया से बचाव होने पर मानसिक शांति बनी रहती है। - षडयंत्रों का नाश
गुप्त नवरात्रि में किए गए उपाय शत्रुओं के षडयंत्रों को निष्क्रिय कर देते हैं। - नकारात्मक ऊर्जा का नाश
शत्रुओं द्वारा भेजी गई नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है। - स्वास्थ्य में सुधार
शत्रु से सुरक्षा पाने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। - व्यवसायिक सफलता
शत्रु नष्ट होते हैं, जिससे व्यवसाय में सफलता और समृद्धि मिलती है। - कर्ज मुक्ति
शत्रुओं से मुक्ति मिलने से व्यक्ति के कर्ज का बोझ कम होता है। - सुख-शांति की प्राप्ति
परिवार में सुख-शांति और प्रेम का वातावरण बनता है। - आध्यात्मिक प्रगति
गुप्त नवरात्रि के दौरान किए गए उपाय से व्यक्ति की आध्यात्मिक प्रगति होती है। - नकारात्मक दृषटिकोन से बचाव
शत्रुओं की बुरी नजर से बचाव होता है। - सार्वजनिक सम्मान में वृद्धि
शत्रु का प्रभाव खत्म होने से व्यक्ति का समाज में सम्मान बढ़ता है। - विवादों का समाधान
गुप्त नवरात्रि के उपाय विवादों को शांत करने में सहायक होते हैं। - स्वास्थ्य में स्थिरता
शत्रु की ऊर्जा से बचकर व्यक्ति का स्वास्थ्य बेहतर होता है। - आर्थिक स्थिति में सुधार
शत्रु के प्रभाव से मुक्ति पाकर आर्थिक स्थिति में सुधार आता है। - संबंधों में सुधार
शत्रु के प्रभाव से बचकर परिवार और मित्रों के साथ संबंधों में सुधार होता है। - आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि
गुप्त नवरात्रि की साधना से आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि होती है।
पृश्न उत्तर
गुप्त नवरात्रि में क्या खास करना चाहिए?
गुप्त नवरात्रि में विशेष रूप से देवी महाविद्या देवियों की पुजा या तंत्र साधना की जाती है।
क्या गुप्त नवरात्रि में व्रत रखना जरूरी है?
नहीं, व्रत रखना जरूरी नहीं है, लेकिन इसे करने से विशेष लाभ मिलता है।
गुप्त नवरात्रि में कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए?
“ॐ ह्ल्रीं बगलामुखे ह्लीं ॐ स्वाहा” मंत्र का जाप करना श्रेष्ठ होता है।
क्या गुप्त नवरात्रि में हवन करना चाहिए?
हां, हवन करने से घर की सुरक्षा बढ़ती है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
गुप्त नवरात्रि में शत्रु से बचने के लिए कौन सा तंत्र उपयोगी है?
काली या बगला तंत्र और शत्रु नाशक मंत्र तंत्र उपयोगी रहते हैं।
क्या गुप्त नवरात्रि में शत्रु से बचने के लिए रूद्राक्ष पहनना चाहिए?
हां, रूद्राक्ष पहनने से शत्रु की बुरी नजर से बचाव होता है।
क्या गुप्त नवरात्रि में घर की सफाई करनी चाहिए?
हाँ, घर की सफाई से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
गुप्त नवरात्रि के दौरान क्या खाएं?
व्रत के दौरान शुद्ध और सात्विक आहार का सेवन करें, जैसे फल, दूध और शाकाहारी भोजन।
क्या गुप्त नवरात्रि में देवी की मूर्ति की पूजा करनी चाहिए?
हां, देवी की मूर्ति या चित्र की पूजा करनी चाहिए।
गुप्त नवरात्रि का मुहुर्त क्या है?
२०२५ में गुप्त नवरात्रि का मुहुर्त 30 जनवरी से 07 फरवरी 2025 तक रहेगा।
12. गुप्त नवरात्रि में शांति और सुरक्षा कैसे प्राप्त करें?
शक्ति और सुरक्षा के लिए देवी के मंत्रों का जाप करें और तंत्र साधना करें।
अंत मे
बगलामुखी मंत्र और पूजा विशेष रूप से शत्रु नाश, मानसिक शांति और समृद्धि के लिए प्रभावी मानी जाती है। यदि आप किसी षडयंत्र से या शत्रु के कुकृत्यों से परेशान हैं, तो बगलामुखी माता की पूजा आपके जीवन में अमूलचूल परिवर्तन ला सकती है। 9 दिन की नियमित पूजा और मंत्र जाप से आप शांति, सफलता और रक्षा की अनुभूति कर सकते हैं।








