बगलामुखी खड्गमाला स्तोत्र परिचय
Bagalamukhi Khadagamala Stotra बगलामुखी खड्गमाला स्तोत्र तांत्रिक परंपरा का अत्यंत रहस्यपूर्ण रचना रूप है। यह मंत्र, कवच, स्तोत्र और शक्ति आवाहन का संयुक्त मार्ग माना जाता है। देवी बगलामुखी के स्तम्भन, मोहन, संरक्षण और विजय स्वरूप को इसमें क्रमिक रूप से जागृत किया जाता है। खड्ग का अर्थ केवल शस्त्र नहीं है। यह चेतना का तेज है। यह विवेक की तलवार है।
साधक इस स्तोत्र द्वारा अपने अंदर की दुर्बलता, भय, शंका और शत्रुभावनाओं को काटता है। इस साधना में शक्ति जगाना है, किसी को दबाना नहीं। स्त्री, पुरुष, ब्रह्मचारी, गृहस्थ सभी कर सकते हैं यदि मन शुद्ध हो।
इस स्तोत्र की रहस्यात्मकता
परंपरा कहती है, गोपनीय ज्ञान, गोपनीय ही शुभ देता है। खड्गमाला का स्पंदन अत्यंत तीव्र होता है। नियम भंग साधक को विपरीत ऊर्जा दे सकता है। इसलिए यह ज्ञान गुरु देता है, पुस्तक नहीं। जिन्होने गुरु नही बनाया है वे भगवान शिव को गुरु मानकर इस स्तोत्र का पाठ कर सकते है।
लाभ
- नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा
- दुष्ट विचारों से मुक्ति
- मानसिक दृढ़ता
- निर्णय शक्ति बढ़े
- वाणी में तेज
- भय का नाश
- कोर्ट-केस और विवाद में सहायता
- शत्रु विचार शांति पाते हैं
- आंतरिक स्थिरता
- दृढ़ संकल्प
- नजर दोष समाधान
- आत्मविश्वास जागृति
- स्वाभिमान शक्ति
- आत्मबल और तेज
- उपाय करने की शक्ति
यह लाभ केवल ईमानदार साधक को प्राप्त होते हैं।
उचित मुहूर्त
- अमावस्या
- गुरुवार
- रात्रि 9 से 12
- ब्रह्म मुहूर्त भी उत्तम
- पीले वस्त्र पहनें
- हल्दी दीपक जलाएँ
शुरुआत शुक्ल पक्ष में करें। सोमवार, गुरुवार, शनिवार श्रेष्ठ।
कौन कर सकता है
- शुद्ध नीयत वाला व्यक्ति
- जो दूसरों को नुकसान नहीं चाहता
- जो साधना को प्रार्थना समझता हो
- गुरु मार्ग स्वीकार करने वाला
- क्रोध, अहंकार छोड़ने को तैयार
यह साधना दया-भाव वाले को ही फल देती है।
खड्गमाला का भावार्थ सार
- माता बगलामुखी को प्रणाम
- शरीर और वाणी की रक्षा
- मन को शांत रखना
- शत्रु विचारों का स्तम्भन
- नकारात्मक ग्रहों का शमन
- आत्मबल का उत्थान
- विवेक तलवार का उद्घाटन
सुरक्षित संक्षिप्त खड्गमाला भाव-पाठ
“देवी, मेरे मन, वाणी, विवेक और कर्म को तेज दो।
दुर्विचारों को रोक दो।
धर्म का मार्ग दिखाओ।
मुझमें शक्ति और करुणा जागृत करो।”
यह भाव ही आपका कवच बनेगा।
मुख्य साधना मंत्र
ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय
जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा
खड्ग-ऊर्जा बीज-मंत्र
ॐ ह्लीं बगलामुखी खड्गायै नमः
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साधना विधि
- पीला आसन
- हल्दी माला
- सरसों का दीपक
- शांत मन
- मंत्र जप
- अंत में मौन 3 मिनट
बगलामुखी खड्गमाला स्तोत्र
ॐ ह्ल्रीं सर्वविनाशकानां सर्वदुष्टानां वाचं स्तम्भय स्तम्भय बुद्धिं स्तम्भय स्तम्भय विनाशय विनाशय अपराकुट्टिं कुट्ट कुहु अपमांत्र कुहु कुत्त आत्मविरोधिणां शिरो–ललाट–मुख–नेत्र–कर्ण–नासिका–दन्तौष्ठ–जिह्वा–तालुकण्ठ–बाहूदर–कुक्षि–नाभि–पार्श्वद्वय–गुह्य–गुदादि–त्रिकाजनुपादस्वर्वाङ्गेषु पादादिकेषु–पर्यन्तं कषायितपादपर्णं स्तम्भय स्तम्भय मायार मायार परमं–परतराणि छेत्त्र छेत्त आत्ममंत्र–यंत्रताणि रक्ष रक्ष सर्वद्वाराणि निवारय निवारय सर्व अविद्या विनाशय विनाशय दुःखं हन हन दारिद्र्यं निवारय निवारय सर्वमन्त्रकराणि सर्वशल्यस्वल्प्यरूपाणि दुःस्वप्न–चण्डाल–भूत–भूतप्रेत–डाकाचक्रग्रह–चौरग्रह–भावग्रह–चाण्डालग्रह–यक्षग्रहपिशाचग्रह बहुराक्षसग्रह–भूत–प्रेत–पिशाचादीनां शाकिनी–डाकिनी–ग्रहाणां पूर्वदिग्दक्षिणदिग्द बध्व बध्व वारायि बगलामुखी मां रक्ष रक्ष दक्षिणदिशि बध्व बध्व किरातवारायि मां रक्ष रक्ष पनिषमदिशि बध्व बध्व स्वप्नवारायि मां रक्ष रक्ष उत्तरदिशि बध्व बध्व धूम्रवारायि मां रक्ष रक्ष सर्वदिग्वारायि बध्व बध्व कुक्कुट वारायि मां रक्ष रक्ष अधरदिशि बध्व बध्व परमेश्वरी मां रक्ष रक्ष सर्वान्तरग विनाशय विनाशय सर्वविग्रहालयानां सर्वविघ्नकृच्छित्त मृत्योत नाशय–नाशय ग्रहणां राज्यस्वर्ण स्वीयानं जनयकादि दह दह चप चप सकललोकस्तम्भिनी शत्रून स्तम्भय स्तम्भय स्तम्भय महामोहजालउपण्णग सर्वीणाणाम उच्चाटय कुहु कुत्त ॐ ह्ल्रीं क्लीं मे वाचाक्वयदाय ल्लों सकलभूपणण्डलाधिपत्यप्रदाय नम दां चिरंजीविने। ह्रीं ह्रीं हूं क्लीं क्लीं करीं। ॐ ह्ल्रीं बगलामुखी वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय राजस्तम्भिनी का को हृीं ह्रीं सर्वजनस्तम्भिनी स्वाहा स्वाहा सर्वदुष्टुद्धारिणि मुखं बध्व बध्व जत्वल जत्वल तेज हरी राजस्थ प्रतिलौम इह्लोक परलोक परतार होहरु राजद्वार क्लीं क्लीं ह्ल्रीं हूं हूं क्लीं क्लीं खणि खणि। जिह्वां बध्वायाम सकलसन्देहक्षयाणि बध्वायाम नागाङ्ग–भुज–सर्प–विषवेदभङ्ग–महाभयुत्पातानि बध्वायाम बध्वायाम दुष्कर्म प्रदलं प्रदलं त्वं ह्ल्रीं ह्ल्रीं आगच्छ आगच्छ अत्रैव निवारय कुहु कुत्त ॐ ह्ल्रीं बाले परमेश्वरि हूं फट स्वाहा॥
अर्थ
बगलामुखी खड्गमाला स्तोत्र–भावार्थ (हिंदी अर्थ)
हे माँ बगलामुखी, आप सभी दुष्ट, नकारात्मक और बाधक शक्तियों का विनाश करने वाली हैं।
मेरे शत्रु, दुर्भावना रखने वाले, हानि चाहने वाले तथा विरोधी तत्वों की वाणी, बुद्धि और शक्ति को स्तम्भित करें।
उनके गलत विचार, षड्यंत्र, मंत्र-तंत्र, दुष्ट इरादे, नजर-दोष, ग्रह-दोष, तंत्र-दुष्प्रयोग, भय, आघात और छुपी शत्रुता को रोक दें।
मेरे शरीर के प्रत्येक अवयव और प्रत्येक दिशा में सुरक्षा प्रदान करें।
मन, बुद्धि, वाणी, कर्म और प्राण में आपका तेज विराजमान रहे।
सभी तामसिक शक्तियाँ, पिशाच, दैत्य, ग्रह-बाधा, दुष्ट दृष्टि, शाप, ईर्ष्या, मानसिक विष, भय, शंका और अनिष्ट दूर हों।
माँ, पूर्व, दक्षिण, पश्चिम, उत्तर, आकाश और पाताल सभी दिशाओं में मेरा कवच बनें।
अंदर-बाहर सभी प्रकार की विपत्तियों का नाश करें।
मुझे दैवीय तेज प्रदान करें।
सत्य और धर्म की रक्षा करते हुए विजय प्रदान करें।
मेरी वाणी से निकलने वाले शब्द सत्य, प्रभावशाली और सिद्धि-युक्त हों।
दुष्टों के दुष्ट कर्म स्वयं उन्हीं पर वापस लौटें।
अज्ञान, भय, भ्रम, अवसाद, दुर्बलता और मोह समाप्त हों।
हे सर्वशक्तिमती बगलामुखी माता,
मेरे साथ सदा-सर्वदा खड़्ग (दिव्य बुद्धि-शक्ति) रूप में रहें।
मुझे आत्मबल, संयम, धैर्य, शांति और विजय दें।
चेतावनी
मूलं मन्त्रवता कुर्यात् विद्या न दर्शयेत्तु कवचिता।
विपत्तौ स्वयकाले च विद्या स्तम्भिनीं दर्शयेत।
गोपनीयं गोपनीयं गोपनीयं प्रयत्नतः।
प्रकाशनात् सिद्धिहानिः त्याद् वर्धं मृत्युं भवेत।
दयया शान्तया सत्यया कोलालाचारयाः च।
दुर्गोपनतया शैवाय मृत्युदुःखदाय च।
तस्मै दयाद्रुहं खड्गं न शिश्या नस्तु संग्रहे।
अशास्त्रवश च नो दद्यात् दीक्षितानां च वै तथा।
न दर्शयेत्तुयं खड्गं इनायाः शङ्करस्य च।।
(इति श्री विघ्नेश्वरीमाते खड्ग–खड्गमाला–मंत्रः समाप्तम्)
अर्थ
विद्या को गोपनीय रखें
जिसे मूल मंत्र, विद्या और कवच प्राप्त है वह इसे किसी भी साधारण व्यक्ति को न बताए। सिर्फ संकट के समय इसका प्रयोग किया जाए। जो इसे प्रकट करता है, उसकी सिद्धि क्षीण होती है और विनाश का कारण बनती है।
केवल योग्य को ही देना चाहिए
यह विद्या दयालु, सत्यप्रिय, शांतचित्त और संयमी को ही देना चाहिए। अयोग्य, दुष्ट, लालची या गलत उद्देश्य रखने वाले को नहीं। बिना दीक्षा या अनुशासन के इस विद्या का उपयोग हानिकारक है।
शिष्य को भी सावधान किया गया है
जो व्यक्ति गुप्तता न रखे, मर्यादा न रखे, वह इस शक्ति से वंचित होता है। जो अनुशासन नहीं निभा सके, उसे यह विद्या नहीं देनी चाहिए।
सामान्य प्रश्न
1. क्या बिना गुरु यह हो सकता है?
केवल प्रारंभिक रूप में। पूर्ण खड्गमाला नहीं। खड्गमाला मंत्र या स्तोत्र का जप गुरु दीक्षा लेने पर ही सफल होता है। जब तक आप दीक्षा नही ले पा रहे है, तब तक भगवान शिव शिव को अपना गुरु मानकर इस स्तोत्र का पाठ कर सकते है।
2. क्या स्त्रियाँ कर सकती हैं?
हाँ, पवित्र भावना से।
3. क्या अनिष्ट के लिए कर सकते हैं?
नहीं। साधना उलटी होती है।
4. कितने दिन करें?
21, 41 या 108 दिन।
5. नियम क्या?
सत्य वचन, संयम, सात्त्विक भोजन।
6. भूल हो जाए तो?
माता से क्षमा माँगें।
7. क्या तेज अनुभव मिलेगा?
हाँ, पर धैर्य रखें। शक्ति शांति बनकर आती है।
महत्वपूर्ण संदेश
साधना का उद्देश्य दूसरों को बदलना नहीं है।
उद्देश्य स्वयं को उज्ज्वल करना है।
आपकी भावना पवित्र है।
वही आपकी सबसे बड़ी शक्ति है।
आपसे विनती है
नीति कायम रखें
भाव शुद्ध रखें
दीक्षा की ओर कदम बढ़ाएँ
आप सिद्धि-मार्ग पर हैं।
आप सफल होंगे।








