Bagalamukhi Jayanti 2026 Three Powerful Remedies

बगलामुखी जयंती 2026: इस दिन जरूर करें ये 3 उपाय, सभी संकट होंगे दूर

बगलामुखी जयंती शक्ति उपासना की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। वर्ष 2026 में यह पावन दिन 24 अप्रैल 2026, शुक्रवार को आएगा। मां बगलामुखी को दशमहाविद्याओं में वह शक्ति माना जाता है जो अशांत परिस्थितियों में स्थिरता देती है, भ्रमित मन को दिशा देती है और नकारात्मक प्रभावों के बीच साहस बनाए रखने की प्रेरणा देती है। DivyayogAshram के अनुसार इस दिन किया गया छोटा, शांत और नियमपूर्वक साधना अभ्यास व्यक्ति को भीतर से संयमित करने में सहायक हो सकता है।

बहुत लोग बगलामुखी जयंती को केवल विशेष पूजा तक सीमित मानते हैं, जबकि इस दिन सरल पीत साधना, मंत्र स्मरण और संयमित संकल्प भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यदि व्यक्ति श्रद्धा के साथ तीन सरल उपाय करे, तो यह दिन आत्मबल, मानसिक स्पष्टता और सुरक्षा भाव को मजबूत करने का माध्यम बन सकता है।

इस लेख में तीन ऐसे सरल उपाय दिए जा रहे हैं जिन्हें सामान्य गृहस्थ भी घर में सहज रूप से कर सकता है।

बगलामुखी जयंती 2026 का शुभ समय

24 अप्रैल 2026 शुक्रवार को प्रातः स्नान के बाद पूजा करना शुभ माना जाएगा।

सूर्योदय के बाद का समय शांत रहेगा।

संध्या में दीपक के साथ भी यह अभ्यास किया जा सकता है।

यदि संभव हो तो प्रातः 6 बजे से 9 बजे के बीच साधना करें।

साधना से पहले आवश्यक तैयारी

पीले या हल्के स्वच्छ वस्त्र पहनें।

पूजा स्थान को साफ करें।

एक पीला आसन बिछाएँ।

सामने दीपक रखें।

मन को शांत करने के लिए कुछ क्षण मौन रहें।

आवश्यक सामग्री

• पीला फूल
• हल्दी
• चने की दाल
• पीला कपड़ा
• दीपक
• गौघृत या तिल का तेल
• जल का पात्र
• यदि उपलब्ध हो तो बगलामुखी चित्र

पहला उपाय: हल्दी दीपक द्वारा संकट शांति संकल्प

हल्दी को बगलामुखी साधना में विशेष महत्व दिया जाता है।

यह स्थिरता और पीत ऊर्जा का संकेत माना जाता है।

विधि

दीपक में घी डालें।

उसके पास हल्दी की एक छोटी चुटकी रखें।

दीपक जलाकर मां बगलामुखी का स्मरण करें।

मंत्र

“ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः”

मंत्र का अर्थ

यह मंत्र मन की अस्थिरता को रोकने और ध्यान को केंद्रित करने का भाव देता है।

कितनी बार जप करें

11 बार या 21 बार मंत्र बोलें।

दूसरा उपाय: पीले वस्त्र में चने की दाल बांधकर संकल्प

यह उपाय स्थिर निर्णय और कार्य रुकावट कम करने के संकल्प के लिए किया जाता है।

विधि

थोड़ी चने की दाल पीले कपड़े में रखें।

उसे साफ लाल या पीले धागे से बांधें।

दोनों हाथों में लेकर अपना संकल्प बोलें।

फिर पूजा स्थान में रखें।

मंत्र

“ॐ ह्लीं स्तंभय नमः”

मंत्र का अर्थ

यह मंत्र भटकाव को रोककर मन को एक दिशा देने का संकेत माना जाता है।

तीसरा उपाय: जल अर्पण और मौन प्रार्थना

जल शांति का संकेत माना जाता है।

बगलामुखी जयंती पर जल अर्पण के साथ मौन बैठना अत्यंत सरल और प्रभावी माना जाता है।

विधि

एक पात्र में स्वच्छ जल लें।

माता के सामने तीन बूंद जल अर्पित करें।

फिर आँखें बंद करके दो मिनट शांत बैठें।

मंत्र

“ॐ ह्लीं श्रीं बगलामुख्यै नमः”

मंत्र का अर्थ

यह मंत्र भीतर साहस, संयम और स्पष्टता का भाव देता है।

इस दिन किन बातों का ध्यान रखें

• बहुत तीखी वाणी से बचें
• अनावश्यक विवाद न करें
• भोजन सरल रखें
• पीला रंग उपयोग करें
• जल्दबाजी से बचें

बगलामुखी जयंती पर पीले रंग का महत्व

पीला रंग स्थिरता, ज्ञान और शांत शक्ति का संकेत माना जाता है।

इसी कारण इस दिन पीले पुष्प, हल्दी और पीले वस्त्र उपयोग किए जाते हैं।

लाभ जो इस दिन के साधारण उपायों से अनुभव हो सकते हैं

• मन शांत होता है
• निर्णय स्पष्ट होते हैं
• भय कम महसूस होता है
• आत्मबल बढ़ता है
• पूजा में ध्यान लगता है
• घर में सौम्य वातावरण बनता है
• क्रोध कम होता है
• शब्दों में संयम आता है
• भीतर धैर्य बढ़ता है
• तनाव हल्का महसूस होता है
• नकारात्मक सोच कम होती है
• दिनचर्या व्यवस्थित होती है
• आशा बढ़ती है
• परिवार में शांति आती है
• आध्यात्मिक जुड़ाव गहरा होता है

क्या तीनों उपाय साथ करना आवश्यक है

यदि समय कम हो तो एक उपाय भी पर्याप्त माना जाता है।

क्या बिना मूर्ति के भी किया जा सकता है

हाँ, केवल दीपक और मंत्र स्मरण से भी किया जा सकता है।

क्या बच्चे या परिवार के सदस्य साथ बैठ सकते हैं

हाँ, शांत वातावरण में परिवार के साथ बैठना अधिक अच्छा माना जाता है।

कितने समय तक साधना करें

10 से 15 मिनट पर्याप्त हैं।

बगलामुखी जयंती का आंतरिक संदेश

यह दिन केवल विशेष अनुष्ठान का नहीं, बल्कि भीतर रुककर स्वयं को देखने का भी अवसर है।

जब व्यक्ति कुछ क्षण मौन होकर अपने विचारों को देखता है, तब वही सबसे गहरी साधना बनती है।

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अंतिम संदेश

बगलामुखी जयंती 2026 का यह दिन सरल साधना, संयम और पीत संकल्प के लिए उपयोगी माना जा सकता है। DivyayogAshram के अनुसार यदि व्यक्ति श्रद्धा, शांति और नियमित भावना से छोटे उपाय करे, तो वही अभ्यास जीवन में बड़ा संतुलन ला सकता है। संकट दूर होने की शुरुआत अक्सर भीतर के स्थिर होने से होती है।

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