Make Five Sacred Talismans On Guru Pushya Yoga

BOOK - 26-27 SEPT. 2026- DAKSHIN KALI SADHANA SHIVIR AT DIVYAYOGA ASHRAM (ONLINE/ OFFLINE)

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गुरु पुष्य योग पर बनाएं 5 प्रकार के तावीज, पहनें और देखें चमत्कार

भारतीय परंपरा में कुछ विशेष योग ऐसे माने गए हैं जिनमें किया गया संकल्प लंबे समय तक प्रभावशाली माना जाता है। उनमें से एक अत्यंत चर्चित योग है गुरु पुष्य योग। जब गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र आता है, तब यह समय स्थिरता, शुभ आरंभ, संरक्षण और आध्यात्मिक संकल्प के लिए अनुकूल माना जाता है। इसी कारण बहुत लोग इस दिन सोना खरीदते हैं, नए कार्य शुरू करते हैं, मंत्र जप आरंभ करते हैं या विशेष रक्षा माध्यम तैयार करते हैं। DivyayogAshram के अनुसार गुरु पुष्य योग का महत्व केवल बाहरी शुभता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन को स्पष्ट संकल्प देने का समय भी माना जाता है।

तावीज भारतीय लोक परंपरा में केवल पहनने की वस्तु नहीं माना गया, बल्कि वह एक स्मरण माध्यम है। जब किसी विशेष मंत्र, भावना, या उद्देश्य के साथ तावीज बनाया जाता है, तब व्यक्ति उसे अपने संकल्प से जोड़ता है। इसलिए तावीज का प्रभाव केवल धातु या वस्तु में नहीं, बल्कि उस समय की भावना, नियम और श्रद्धा में माना जाता है।

यहाँ पाँच प्रकार के सरल तावीज बताए जा रहे हैं जिन्हें गुरु पुष्य योग के दिन बनाया जा सकता है।

गुरु पुष्य योग का समय क्यों विशेष माना जाता है

गुरु ज्ञान, स्थिरता और मार्गदर्शन का संकेत माना जाता है।

पुष्य नक्षत्र पोषण और विस्तार का प्रतीक माना जाता है।

जब दोनों साथ आते हैं, तब संकल्प को स्थिर माना जाता है।

तावीज बनाने से पहले की तैयारी

सुबह स्नान करें।

हल्के स्वच्छ वस्त्र पहनें।

पूजा स्थान या शांत स्थान पर बैठें।

एक दीपक जलाएँ।

मन को शांत करने के लिए तीन गहरी श्वास लें।

आवश्यक सामान्य सामग्री

• पीला कपड़ा
• लाल धागा
• भोजपत्र या स्वच्छ कागज
• चंदन
• हल्दी
• अक्षत
• छोटा तांबे या चांदी का कवर यदि उपलब्ध हो

पहला तावीज: धन स्थिरता तावीज

यह तावीज आर्थिक अनुशासन और स्थिरता के संकल्प के लिए बनाया जाता है।

विधि

भोजपत्र पर हल्दी से छोटा “श्री” लिखें।

उसे पीले कपड़े में मोड़ें।

लाल धागे से बाँधें।

मंत्र

“ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”

मंत्र का अर्थ

यह मंत्र स्थिर समृद्धि और संतुलित उपयोग का संकेत देता है।

दूसरा तावीज: मानसिक शांति तावीज

जब मन बहुत भटके या तनाव बढ़े, तब यह माध्यम उपयोगी माना जाता है।

विधि

सफेद कागज पर चंदन से “ॐ” लिखें।

छोटे कपड़े में रखें।

मंत्र

“ॐ नमः शिवाय”

मंत्र का अर्थ

यह मंत्र भीतर शांति और स्वीकार का भाव जगाता है।

तीसरा तावीज: कार्य सिद्धि तावीज

जब कोई महत्वपूर्ण कार्य शुरू करना हो, तब यह संकल्प तावीज बनाया जाता है।

विधि

भोजपत्र पर हल्दी से “गं” लिखें।

पीले कपड़े में मोड़ें।

मंत्र

“ॐ गं गणपतये नमः”

मंत्र का अर्थ

यह मंत्र आरंभ और बाधा शांति का संकेत माना जाता है।

चौथा तावीज: संबंध मधुरता तावीज

पति पत्नी, परिवार या संवाद में मधुरता के लिए यह तावीज बनाया जाता है।

विधि

छोटे कागज पर चंदन से “राधे” लिखें।

गुलाबी या पीले कपड़े में रखें।

मंत्र

“ॐ राधाकृष्णाय नमः”

मंत्र का अर्थ

यह मंत्र संबंधों में कोमलता का भाव लाता है।

पाँचवाँ तावीज: सुरक्षा तावीज

यह मानसिक साहस और आत्मबल के लिए बनाया जाता है।

विधि

भोजपत्र पर सिंदूर से “हं” लिखें।

लाल धागे से बाँधें।

मंत्र

“ॐ हं हनुमते नमः”

मंत्र का अर्थ

यह मंत्र आत्मविश्वास और साहस से जुड़ा माना जाता है।

तावीज पहनने का सही समय

गुरु पुष्य योग के दिन मंत्र के बाद दाहिने हाथ में लें।

आँखें बंद करके अपना संकल्प बोलें।

फिर गले, बाजू या जेब में रखें।

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कितनी बार मंत्र बोलें

हर तावीज के लिए 11 बार मंत्र पर्याप्त है।

तावीज कितने दिन रखें

21 दिन तक रखें।

फिर स्वच्छ स्थान पर सुरक्षित रखें।

किन बातों का ध्यान रखें

• तावीज बनाते समय मन शांत रखें
• जल्दी में न करें
• किसी पर दिखावे के लिए न पहनें
• इसे श्रद्धा से रखें

लाभ जो इस अभ्यास से अनुभव हो सकते हैं

• मन में संकल्प स्पष्ट होता है
• नियमितता आती है
• पूजा में रुचि बढ़ती है
• आत्मविश्वास बढ़ता है
• मानसिक स्थिरता मिलती है
• छोटे कार्यों में ध्यान बढ़ता है
• परिवार में सौम्यता आती है
• क्रोध कम महसूस होता है
• सकारात्मक सोच बढ़ती है
• निर्णय में स्पष्टता आती है
• भीतर धैर्य बढ़ता है
• लक्ष्य याद रहता है
• अनुशासन मजबूत होता है
• आशा बढ़ती है
• आध्यात्मिक जुड़ाव गहरा होता है

क्या सभी तावीज साथ पहन सकते हैं

एक समय में एक या दो तावीज पर्याप्त माने जाते हैं।

क्या बच्चों के लिए बनाया जा सकता है

हाँ, सरल मंत्र के साथ बनाया जा सकता है।

क्या बिना भोजपत्र के संभव है

हाँ, स्वच्छ कागज भी उपयोग किया जा सकता है।

गुरु पुष्य योग पर संकल्प क्यों महत्वपूर्ण है

इस दिन बनाया गया तावीज तभी सार्थक माना जाता है जब उसके साथ स्पष्ट संकल्प जुड़ा हो।

अंतिम भाव

तावीज का अर्थ केवल बाहरी सुरक्षा नहीं, बल्कि भीतर की याद है कि व्यक्ति अपने संकल्प से जुड़ा रहे। DivyayogAshram के अनुसार गुरु पुष्य योग जैसे शांत समय पर बनाए गए सरल माध्यम व्यक्ति को नियमितता, ध्यान और सकारात्मक दिशा की ओर ले जाते हैं। चमत्कार का अनुभव अक्सर वहीं से शुरू होता है जहाँ मन स्थिर होकर विश्वास के साथ एक छोटा अभ्यास नियमित रूप से करता है।

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