Hariyali Teej Puja Vidhi 2024: Rules, Muhurta and Benefits

हरियाली तीज

Hariyali Teej एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जो विशेष रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की स्मृति में मनाया जाता है। हरियाली तीज का पर्व श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। यह पर्व हरे-भरे पेड़ों और हरियाली से जुड़ा होने के कारण हरियाली तीज कहलाता है।

नियम

  1. स्नान और शुद्धि: तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध वस्त्र पहनें।
  2. उपवास: विवाहित महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। यह व्रत सूर्योदय से चंद्र दर्शन तक चलता है।
  3. श्रृंगार: इस दिन महिलाएं विशेष श्रृंगार करती हैं। हरे रंग के वस्त्र, चूड़ियां, बिंदी, मेंहदी और अन्य आभूषण धारण करती हैं।
  4. पूजा सामग्री: पूजा के लिए भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश की मूर्तियां, जल, फल, फूल, रोली, चंदन, दीपक, मिठाई और अन्य सामग्री तैयार रखें।
  5. भक्ति गीत और नृत्य: इस दिन महिलाएं भक्ति गीत गाती हैं और नृत्य करती हैं। झूला झूलने की भी परंपरा है।
  6. कथाएं सुनना: इस दिन तीज से संबंधित कथाएं सुनने और सुनाने की परंपरा है।

मुहूर्त

हरियाली तीज का मुहूर्त तृतीया तिथि पर निर्भर करता है। यह तिथि श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष में आती है। तिथि और समय के अनुसार पूजा का शुभ मुहूर्त चुना जाता है। आमतौर पर यह दिनभर मनाया जाता है, लेकिन पूजा का समय सुबह और शाम के समय उपयुक्त माना जाता है।

विधि

  1. स्थापना: सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करें और उसे गंगाजल से पवित्र करें। इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश की मूर्तियों को स्थापना करें।
  2. मंत्र उच्चारण: पूजन के दौरान “ऊँ नमः शिवाय” और “ऊँ पार्वतीपतये नमः” मंत्रों का जाप करें।
  3. जल अर्पण: भगवान शिव और माता पार्वती को जल अर्पित करें।
  4. स्नान: मूर्तियों को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से स्नान कराएं और गंगाजल से शुद्ध करें।
  5. वस्त्र और आभूषण: भगवान शिव और माता पार्वती को वस्त्र और आभूषण अर्पित करें।
  6. चंदन और रोली: मूर्तियों पर चंदन और रोली का तिलक करें।
  7. फूल और माला: मूर्तियों को फूलों की माला अर्पित करें।
  8. भोग: भगवान को मिठाई, फल और विशेष पकवान का भोग लगाएं।
  9. आरती: दीपक जलाकर भगवान की आरती करें। शंख और घंटी बजाकर वातावरण को पवित्र करें।
  10. व्रत कथा: तीज व्रत की कथा का पाठ करें या सुनें। इससे व्रत की महिमा और महत्व को समझा जा सकता है।
  11. व्रत समापन: रात को चंद्र दर्शन के बाद व्रत का समापन करें। इस समय जल पीकर और फलाहार ग्रहण करके व्रत खोलें।

हरियाली तीज के लाभ

  1. वैवाहिक जीवन में सुख: हरियाली तीज का व्रत विवाहित महिलाओं के वैवाहिक जीवन में सुख और शांति लाता है।
  2. पति की लंबी आयु: इस व्रत को रखने से पति की लंबी आयु और स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  3. अविवाहितों के लिए: अविवाहित लड़कियां भी यह व्रत रख सकती हैं, जिससे उन्हें अच्छा जीवनसाथी प्राप्त होता है।
  4. धार्मिक दृष्टि से: यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति आस्था को बढ़ाता है।
  5. आध्यात्मिक लाभ: व्रत और पूजा करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतोष प्राप्त होता है।
  6. स्वास्थ्य में सुधार: उपवास करने से शरीर का विषाक्त पदार्थ बाहर निकलता है और स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  7. पारिवारिक बंधन: इस पर्व को परिवार के साथ मनाने से पारिवारिक बंधन मजबूत होते हैं।
  8. समृद्धि: भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से घर में समृद्धि आती है।
  9. मन की शांति: पूजा और मंत्र जाप से मन को शांति मिलती है।
  10. सकारात्मक ऊर्जा: घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  11. धैर्य और संयम: व्रत रखने से धैर्य और संयम की प्राप्ति होती है।
  12. पुण्य अर्जन: इस व्रत को रखने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
  13. सौभाग्य की वृद्धि: यह व्रत सौभाग्य और धन की वृद्धि करता है।
  14. सौंदर्य और आकर्षण: श्रृंगार करने से महिलाओं के सौंदर्य और आकर्षण में वृद्धि होती है।
  15. मानसिक बल: व्रत और पूजा करने से मानसिक बल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
  16. भक्ति भाव: भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति भक्ति भाव बढ़ता है।
  17. सामाजिक समरसता: यह पर्व समाज में सामूहिकता और समरसता को बढ़ाता है।
  18. संस्कृति और परंपरा: यह पर्व भारतीय संस्कृति और परंपरा को जीवित रखता है।
  19. धार्मिक ज्ञान: व्रत और कथा सुनने से धार्मिक ज्ञान में वृद्धि होती है।
  20. आत्मिक शुद्धि: व्रत और पूजा से आत्मा की शुद्धि होती है।

हरियाली तीज: सामान्य प्रश्न (FAQ)

1. हरियाली तीज क्या है?

हरियाली तीज एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जो भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की स्मृति में मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है और श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है।

2. हरियाली तीज कब मनाई जाती है?

हरियाली तीज श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह तिथि जुलाई या अगस्त में पड़ती है।

3. हरियाली तीज का क्या महत्व है?

हरियाली तीज का महत्व भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा में है। विवाहित महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।

4. हरियाली तीज के नियम क्या हैं?

हरियाली तीज के नियमों में स्नान और शुद्धि, उपवास, श्रृंगार, पूजा सामग्री की तैयारी, भक्ति गीत और नृत्य, और तीज कथा सुनना शामिल है।

5. हरियाली तीज का व्रत कैसे रखा जाता है?

हरियाली तीज का व्रत निर्जला व्रत होता है। महिलाएं सूर्योदय से चंद्र दर्शन तक बिना जल ग्रहण किए व्रत रखती हैं और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं।

6. हरियाली तीज की पूजा विधि क्या है?

हरियाली तीज की पूजा विधि में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश की मूर्तियों की स्थापना, जल अर्पण, पंचामृत स्नान, वस्त्र और आभूषण अर्पित करना, चंदन और रोली का तिलक करना, फूल और माला अर्पित करना, भोग लगाना, आरती करना, और व्रत कथा सुनना शामिल है।

7. हरियाली तीज के दौरान महिलाएं क्या पहनती हैं?

हरियाली तीज के दौरान महिलाएं हरे रंग के वस्त्र, चूड़ियां, बिंदी, मेंहदी और अन्य आभूषण धारण करती हैं।

8. हरियाली तीज के लाभ क्या हैं?

हरियाली तीज के लाभों में वैवाहिक जीवन में सुख, पति की लंबी आयु, अविवाहितों के लिए अच्छा जीवनसाथी, धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ, स्वास्थ्य में सुधार, पारिवारिक बंधन, समृद्धि, मन की शांति, सकारात्मक ऊर्जा, धैर्य और संयम, पुण्य अर्जन, सौभाग्य की वृद्धि, सौंदर्य और आकर्षण, मानसिक बल, भक्ति भाव, सामाजिक समरसता, संस्कृति और परंपरा का संरक्षण, धार्मिक ज्ञान, और आत्मिक शुद्धि शामिल हैं।

9. हरियाली तीज के दिन क्या खाना चाहिए?

हरियाली तीज के दिन व्रत के दौरान भोजन ग्रहण नहीं किया जाता। व्रत खोलने के बाद फलाहार या हल्का भोजन ग्रहण किया जा सकता है।

10. क्या अविवाहित लड़कियां हरियाली तीज का व्रत रख सकती हैं?

हाँ, अविवाहित लड़कियां भी हरियाली तीज का व्रत रख सकती हैं। यह व्रत उन्हें अच्छा जीवनसाथी प्राप्त करने और उनके वैवाहिक जीवन में सुख और शांति लाने में सहायक होता है।

11. हरियाली तीज के दिन कौन-कौन से मंत्रों का जाप करना चाहिए?

हरियाली तीज के दिन “ऊँ नमः शिवाय” और “ऊँ पार्वतीपतये नमः” मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।

12. हरियाली तीज के दिन कौन-कौन से भोग अर्पित किए जाते हैं?

हरियाली तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती को फल, मिठाई, पंचामृत, और विशेष पकवानों का भोग अर्पित किया जाता है।

13. हरियाली तीज के दिन कौन-कौन से गीत गाए जाते हैं?

हरियाली तीज के दिन महिलाएं भक्ति गीत और तीज से संबंधित लोकगीत गाती हैं। ये गीत भगवान शिव और माता पार्वती की महिमा का बखान करते हैं।

14. हरियाली तीज के दिन कौन-कौन से फूलों का प्रयोग होता है?

हरियाली तीज के दिन पूजा के लिए तुलसी, बेलपत्र, कमल, गुलाब, और अन्य सुगंधित फूलों का प्रयोग किया जाता है।

15. क्या हरियाली तीज के दिन झूला झूलना शुभ माना जाता है?

हाँ, हरियाली तीज के दिन झूला झूलने की परंपरा है और इसे शुभ माना जाता है। महिलाएं और लड़कियां इस दिन पेड़ों पर झूला डालकर झूलती हैं।

16. हरियाली तीज के दिन कौन-कौन सी कथाएं सुनी जाती हैं?

हरियाली तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की व्रत कथा सुनी जाती है, जिसमें उनके पुनर्मिलन की कहानी और तीज व्रत की महिमा का वर्णन होता है।

17. हरियाली तीज का व्रत कैसे तोड़ा जाता है?

हरियाली तीज का व्रत चंद्र दर्शन के बाद तोड़ा जाता है। इस समय महिलाएं जल पीकर और फलाहार ग्रहण करके व्रत खोलती हैं।

18. क्या हरियाली तीज का व्रत केवल विवाहित महिलाएं ही रख सकती हैं?

मुख्यतः हरियाली तीज का व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखती हैं, लेकिन अविवाहित लड़कियां भी इसे रख सकती हैं।

19. हरियाली तीज के दिन कौन-कौन से व्रत नियमों का पालन करना चाहिए?

हरियाली तीज के दिन स्नान और शुद्धि, निर्जला व्रत, श्रृंगार, पूजा सामग्री की तैयारी, भक्ति गीत और नृत्य, और तीज कथा सुनने जैसे नियमों का पालन करना चाहिए।

20. क्या हरियाली तीज का व्रत धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है?

हाँ, हरियाली तीज का व्रत धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति आस्था को बढ़ाता है और धार्मिक पुण्य की प्राप्ति कराता है।

हरियाली तीज का पर्व महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यह न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है। इस पर्व को मनाकर महिलाएं अपने जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि प्राप्त कर सकती हैं।