Gayatri gupta chalisa paath

सद्बुद्धि व ज्ञान का मार्ग दिखाने वाली माता गायत्री चालीसा के पाठ के कई लाभ हैं, जैसे कि:

  1. बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति: गायत्री चालीसा का पाठ करने से बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि होती है, जिससे व्यक्ति की सोचने और समझने की क्षमता में सुधार होता है।
  2. मन की शांति: गायत्री चालीसा का पाठ मन को शांति प्रदान करता है और मानसिक स्थिति को स्थिर करता है।
  3. स्वास्थ्य लाभ: गायत्री चालीसा के पाठ से शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है और रोगों से बचाव होता है।
  4. कर्मठता और समर्पण: गायत्री चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति का कर्मठता में वृद्धि होती है और उसमें समर्पण की भावना उत्पन्न होती है।
  5. ध्यान की शक्ति: गायत्री चालीसा का पाठ करने से ध्यान की शक्ति में वृद्धि होती है और मन ध्यान में एकाग्र होता है।
  6. भाग्य और सौभाग्य की प्राप्ति: गायत्री चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को भाग्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
  7. कल्याणकारी ऊर्जा: गायत्री चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के आसपास की ऊर्जा पॉजिटिव बनती है और उसके जीवन में कल्याणकारी परिवर्तन होता है।
  8. विघ्न नाश: गायत्री चालीसा के पाठ से विघ्न नाश होता है और कार्यों में समृद्धि होती है।
  9. आत्मविश्वास: गायत्री चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है और उसमें सकारात्मकता की भावना उत्पन्न होती है।
  10. आध्यात्मिक उन्नति: गायत्री चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति होती है और उसे अपने जीवन का उद्देश्य स्पष्ट होता है।

॥ दोहा॥ गायत्री चालीसा जो कोई गावै। जापराम भाग्य सहज सुख पावै॥

॥ चालीसा ॥ जयति जयति गायत्री देवी, राजाधिराजप्रिय भारती। सन्मान देवी कामना तुमको, वेद माता कल्याण रूपिणी॥

भारत के जन-जन की रक्षा करने वाली गायत्री देवी! आप हमें सम्मान दें, कामना पूरी करें और वेद माता हैं, जो सबका कल्याण करने वाली हैं॥

मन में स्थिरता प्रदान करने वाली, विश्व को पवित्र करने वाली। धरती पर सम्मानित वाणी तुम्हारी, त्रिदश-गण गाते स्तुति तुम्हारी॥

आप मन को स्थिर बनाने वाली हैं, विश्व को पवित्र करने वाली हैं। आपकी वाणी को धरती पर सम्मानित किया जाता है और त्रिदशीय देवताओं की स्तुति आपके लिए गाते हैं॥

सर्वसुखकर्त्री स्वर्गमंगला, वाणी सुनीति सुभग शालिनी। मुनि जन माता शील विनोदिनी, भाव भीनी भर्ग भाविनी॥

आप सब सुख को प्रदान करने वाली हैं, स्वर्गमंगला हैं, वाणी सुनीति और सुभग शालिनी हैं। आप मुनियों की माता हैं, शील विनोदिनी हैं, भावना भारी और भाविनी हैं॥

कृपा करो गायत्री माता, संकट मोर दूर करो। मन का मण्दिर अखण्ड ज्योति, बनायो अपने द्वार करो॥

आप हमें कृपा करें, संकट को दूर करें। हमारे मन का मंदिर अखण्ड ज्योति बनाएं, और अपने द्वार के समीप हमें ले जाएं॥

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

सर्व शुभकारक सर्वोत्तमे, सभी अर्थों की प्राप्ति करने वाली। आप शरणागति को धारण करने वाली हैं, त्र्यम्बकी, गौरी, नारायणी, आपको नमस्कार हैं॥

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