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Annapurna chalisa paath

जीवन मे सुख समृद्धि देने वाली अन्नपूर्णा चालीसा के पाठ के कई लाभ हैं, जैसे कि:

  1. भोजन की क्षमता में वृद्धि: अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने से भोजन की क्षमता में वृद्धि होती है और भोजन का आनंद लिया जा सकता है।
  2. धन संपत्ति में वृद्धि: अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने से धन संपत्ति में वृद्धि होती है और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
  3. आरोग्य और स्वास्थ्य का उन्नति: अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने से आरोग्य और स्वास्थ्य में सुधार होता है और रोगों से बचाव होता है।
  4. शांति और सुकून: अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने से मानसिक शांति और सुकून मिलता है और मन में प्रसन्नता की भावना उत्पन्न होती है।
  5. आत्म-समर्पण की भावना: अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने से आत्म-समर्पण की भावना उत्पन्न होती है और व्यक्ति अपने कार्यों को ईश्वर के लिए समर्पित करता है।
  6. कार्यों में सफलता: अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने से कार्यों में सफलता मिलती है और संघर्षों को आसानी से पार किया जा सकता है।
  7. जीवन में समृद्धि: अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में समृद्धि और उत्तम स्थिति की प्राप्ति होती है।
  8. धर्मिक उन्नति: अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने से धार्मिक उन्नति होती है और व्यक्ति का धर्मिक जीवन सुधारता है।
  9. समाज में सम्मान: अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को समाज में सम्मान मिलता है और उसका सम्मान बढ़ता है।
  10. प्राणी प्रेम: अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति में प्राणी प्रेम की भावना उत्पन्न होती है
  11. अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने से भक्तों को भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।
  12. अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने से भक्तों को धन, धान्य, और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  13. अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने से भक्तों को भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

दोहा

विश्वेश्वर पदपदम की रज निज शीश लगाय। अन्नपूर्णे, तव सुयश बरनौं कवि मतिलाय।

चौपाई

जय जय जय जगदम्बा, अन्नपूर्णे भवानी। पार्वती, उमा, गौरी, जगन्माता रानी।।

जय जय जय जगदम्बा, अन्नपूर्णे भवानी।

कर मँह शंख चक्र गदा, कमंडलु सोहै। कनक मृगमद की माला, गले मोतीन की जयमाला।।

जय जय जय जगदम्बा, अन्नपूर्णे भवानी।

कमल विलोचन विलसित, भाले देवि कालिके चण्डि कराले। तुम कैलाश मांहि है गिरिजा, विलसी आनंद साथ सिंधुजा।।

जय जय जय जगदम्बा, अन्नपूर्णे भवानी।

स्वर्ग महालक्ष्मी कहलायी, मर्त्य लोक लक्ष्मी पदपायी। विलसी सब मँह सर्व सरुपा, सेवत तोहिं अमर पुर भूपा।।

जय जय जय जगदम्बा, अन्नपूर्णे भवानी।

जो पढ़िहहिं यह तव चालीसा, फल पाइंहहि शुभ साखी ईसा। प्रात समय जो जन मन लायो, पढ़िहहिं भक्ति सुरुचि अघिकायो।।

जय जय जय जगदम्बा, अन्नपूर्णे भवानी।

स्त्री कलत्र पति मित्र पुत्र युत, परमैश्रवर्य लाभ लहि अद्भुत। राज विमुख को राज दिवावै, जस तेरो जन सुजस बढ़ावै।।

जय जय जय जगदम्बा, अन्नपूर्णे भवानी।

पाठ महा मुद मंगल दाता, भक्त मनोवांछित निधि पाता। कष्ट मिटावै सुख संपदा, देहि जगत जननी सुख राधा।।

जय जय जय जगदम्बा, अन्नपूर्णे भवानी।

दोहा

जो यह चालीसा सुभग, पढ़ि नावैंगे माथ। तिनके कारज सिद्ध सब, साखी काशी नाथ।

माता अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने की विधि:

  • अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने के लिए, आपको सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए।
  • अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने के लिए, आपको भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा के सामने बैठना चाहिए।
  • अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करते समय, आपको एकाग्रता और भक्तिभाव रखना चाहिए।
  • अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ कम से कम 40 दिनों तक नियमित रूप से करना चाहिए।

अन्नपूर्णा चालीसा एक शक्तिशाली और मंगलकारी चालीसा है। अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने से भक्तों को भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है, और उन्हें धन, धान्य, समृद्धि, और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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