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Bajarang baan paath

कम से कम ४० दिन तक बजरंग बाण का पाठ करने से निम्नलिखित लाभ होते हैं:

  1. भय नाश: चालीसा का पाठ करने से भक्त का भय और डर दूर होता है।
  2. रोग निवारण: बजरंग बाण चालीसा का पाठ करने से भक्त को रोगों से मुक्ति मिलती है।
  3. कष्टों का नाश: चालीसा का पाठ करने से भक्त के जीवन से कष्टों का नाश होता है।
  4. संतान सुख: माता बजरंग बाण की कृपा से चालीसा का पाठ करने से संतान सुख मिलता है।
  5. कार्य सफलता: चालीसा का पाठ करने से भक्त के कार्यों में सफलता मिलती है।
  6. शत्रु नाश: चालीसा का पाठ करने से भक्त के शत्रुओं का नाश होता है।
  7. धन संपत्ति: माता बजरंग बाण की कृपा से चालीसा का पाठ करने से भक्त को धन संपत्ति की प्राप्ति होती है।
  8. मानसिक शांति: चालीसा का पाठ करने से भक्त को मानसिक शांति मिलती है।
  9. आर्थिक सुधार: बजरंग बाण चालीसा का पाठ करने से भक्त की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
  10. आत्म-विश्वास: चालीसा का पाठ करने से भक्त का आत्म-विश्वास बढ़ता है।
  11. शांति और सुख: चालीसा का पाठ करने से भक्त को शांति और सुख मिलता है।
  12. आर्थिक सफलता: चालीसा का पाठ करने से भक्त की आर्थिक सफलता होती है।
  13. कष्टों का हल: चालीसा का पाठ करने से भक्त के कष्टों का हल होता है।
  14. संतान सुख: बजरंग बाण चालीसा का पाठ करने से संतान सुख प्राप्ति होती है।
  15. धर्म का पालन: चालीसा का पाठ करने से भक्त का धर्म का पालन करता है।

ये थे बजरंग बाण चालीसा के कुछ लाभ। चालीसा का पाठ भक्ति और श्रद्धा से किया जाना चाहिए।

बजरंग बाण जिसे भगवान हनुमान की महानता और उनकी शक्ति को प्रकट करने के लिए प्रशंसा के रूप में पाठ किया जाता है। यह स्त्रोत भगवान हनुमान के भक्तों द्वारा भक्ति और आराधना के लिए प्रयोग किया जाता है। बजरंग बाण के पाठ से भक्त को शक्ति, सुख, और संतुष्टि मिलने की कामना की जाती है। यह स्त्रोत अनुष्ठान के दौरान भगवान हनुमान की कृपा प्राप्ति के लिए किया जाता है।

यदि आप बजरंग बाण स्त्रोत के पाठ की अनुष्ठानिक रूप से आवश्यकता है, तो यहाँ आपको बजरंग बाण स्त्रोत का पूरा पाठ उपलब्ध है:

दोहा निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करें हनुमान ॥

जय हनुमन्त संत हितकारी । सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ।।
जन के काज बिलम्ब न कीजै । आतुर दौरि महासुख दीजै ।।
जैसे कूदी सिन्धु महि पारा । सुरसा बदन पैठी विस्तारा ।।
आगे जाय लंकिनी रोका । मारेहु लात गई सुर लोका ।।
जाय विभीषण को सुख दीन्हा । सीता निरखि परम-पद लीना ।।
बाग उजारि सिन्धु मह बोरा । अति आतुर जमकातर तोरा ।।
अक्षय कुमार मारि संहारा । लूम लपेटि लंक को जारा ।।
लाह समान लंक जरि गई । जय-जय धुनि सुरपुर में भई ।।
अब बिलम्ब केहि कारन स्वामी । कृपा करहु उर अन्तर्यामी ।।
जय जय लखन प्रान के दाता । आतुर होई दु:ख करहु निपाता ।।
जै गिरिधर जै जै सुख सागर । सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥
ओम हनु हनु हनु हनुमंत हठीले । बैरिहि मारु बज्र की कीले॥
गदा बज्र लै बैरिहि मारो । महाराज प्रभु दास उबारो ।।
ओंकार हुंकार महाप्रभु धाओ । बज्र गदा हनु विलम्ब न लाओ ।।
ओम ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा । ओम हुं हुं हुं हनु अरि उर-सीसा॥
सत्य होहु हरी शपथ पायके । राम दूत धरु मारू जायके
जय जय जय हनुमन्त अगाधा । दुःख पावत जन केहि अपराधा ।।
पूजा जप-तप नेम अचारा । नहिं जानत हो दास तुम्हारा ।।
वन उपवन मग गिरि गृह मांहीं । तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ।।
पायं परौं कर जोरी मनावौं । येहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।।
जय अंजनी कुमार बलवंता । शंकर सुवन वीर हनुमंता ।।
बदन कराल काल कुलघालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक ।।
भूत प्रेत पिसाच निसाचर। अगिन वैताल काल मारी मर ।।
इन्हें मारु, तोहि शपथ राम की । राखउ नाथ मरजाद नाम की ।।
जनकसुता हरि दास कहावो । ताकी शपथ विलम्ब न लावो ।।
जै जै जै धुनि होत अकासा । सुमिरत होत दुसह दुःख नासा ।।
चरण शरण कर जोरि मनावौं । यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।।
उठु उठु चलु तोहि राम-दोहाई । पायँ परौं, कर जोरि मनाई ।।
ओम चं चं चं चं चपल चलंता । ओम हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता ।।
ओम हं हं हाँक देत कपि चंचल । ओम सं सं सहमि पराने खल-दल ।।
अपने जन को तुरत उबारौ । सुमिरत होय आनंद हमारौ ।।
यह बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहो फिर कोन उबारै ।।
पाठ करै बजरंग बाण की । हनुमत रक्षा करैं प्रान की ।।
यह बजरंग बाण जो जापैं । ताते भूत-प्रेत सब कापैं ।।
धूप देय अरु जपै हमेशा । ताके तन नहिं रहै कलेसा ।।

दोहा : प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान ।
तेहि के कारज सकल सुभ, सिद्ध करैं हनुमान ।।

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