Cheti Yakshini Mantra Sadhana for Antiaging & Wish

चेटी यक्षिणी साधना का विवरण

चेटी यक्षिणी साधना एक रहस्यमयी और शक्तिशाली साधना है जिसे करने से साधक को यक्षिणी की कृपा प्राप्त होती है। चेटी यक्षिणी एक दिव्य शक्ति है जो साधक को धन, समृद्धि, और आकर्षण शक्ति प्रदान करती है। इस साधना का उद्देश्य जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करना है।

साधना के लाभ

  1. सभी इच्छाओं की पूर्ति: साधना से साधक की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
  2. धन और समृद्धि: साधना करने से धन और समृद्धि प्राप्त होती है।
  3. आकर्षण शक्ति: साधक में अद्वितीय आकर्षण शक्ति विकसित होती है।
  4. वशीकरण: साधक दूसरों को अपने वश में करने की शक्ति प्राप्त करता है।
  5. संकटों से मुक्ति: जीवन के सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है।
  6. सुख और शांति: साधना से साधक के जीवन में सुख और शांति का वास होता है।
  7. सिद्धियों की प्राप्ति: साधना से साधक को अनेक सिद्धियां प्राप्त होती हैं।
  8. साहस और आत्मविश्वास: साधक का साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।
  9. स्वास्थ्य लाभ: साधना से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  10. शत्रुओं से रक्षा: साधक के शत्रु उससे दूर रहते हैं और उसे कोई हानि नहीं पहुंचा सकते।
  11. आध्यात्मिक उन्नति: साधक की आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  12. शुभ फल: साधना से साधक को जीवन के हर क्षेत्र में शुभ फल प्राप्त होते हैं।
  13. परिवार का कल्याण: साधक के परिवार का कल्याण होता है।
  14. मान-सम्मान: साधक को समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है।
  15. कार्य सिद्धि: साधक के सभी कार्य बिना किसी बाधा के सिद्ध होते हैं।
  16. सकारात्मक ऊर्जा: जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा का संचार होता है।
  17. दुष्प्रभावों से रक्षा: साधक नकारात्मक ऊर्जाओं और दुष्प्रभावों से सुरक्षित रहता है।
  18. सच्चे मित्रों की प्राप्ति: साधक को सच्चे मित्र और शुभचिंतक मिलते हैं।
  19. कुंडली दोषों का नाश: साधना से कुंडली के दोष दूर होते हैं।
  20. दीर्घायु: साधक को दीर्घायु का वरदान मिलता है।

साधना सामग्री

  1. चेटी यक्षिणी की मूर्ति या चित्र: साधना स्थल पर स्थापित करने के लिए।
  2. पीले वस्त्र: साधना के समय पहनने के लिए।
  3. हल्दी की माला: मंत्र जप के लिए।
  4. गुलाब के फूल: पूजा और अर्पण के लिए।
  5. धूप और दीपक: आरती और पूजा के लिए।
  6. पंचामृत: अर्पण और अभिषेक के लिए।
  7. सिंदूर: यक्षिणी को अर्पित करने के लिए।
  8. मिठाई: प्रसाद के रूप में।

साधना विधि

  1. स्थान चयन: साधना के लिए एक शांत और पवित्र स्थान का चयन करें।
  2. स्वच्छता: स्नान करके स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
  3. मूर्ति या चित्र स्थापना: चेटी यक्षिणी की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें।
  4. पूजा सामग्री की व्यवस्था: सभी पूजा सामग्री को सामने रखें।
  5. आरंभिक प्रार्थना: भगवान गणेश का ध्यान और प्रार्थना करें ताकि साधना बिना विघ्न के संपन्न हो।
  6. अभिषेक: पंचामृत और गंगाजल से यक्षिणी की मूर्ति या चित्र का अभिषेक करें।
  7. धूप और दीपक: धूप और दीपक जलाएं।
  8. फूल अर्पण: गुलाब के फूल चेटी यक्षिणी को अर्पित करें।
  9. मंत्र जप: हल्दी की माला से चेटी यक्षिणी मंत्र का ५४० बार जप यानी ५ माला रोज करें।
  • चेटी यक्षिणी मंत्र: “ॐ ह्रीं श्रीं चेटी यक्षिणी कार्य सिद्धिम् देही देही स्वाहा”
  1. आरती: सिंदूर अर्पित करके दीपक से आरती करें।
  2. प्रसाद: मिठाई का प्रसाद अर्पित करें और बाद में स्वयं ग्रहण करें।

साधना की अवधि

चेटी यक्षिणी साधना की अवधि साधक की सुविधानुसार हो सकती है। इसे निम्नलिखित अवधि में किया जा सकता है:

  • 21 दिन
  • 40 दिन
  • 108 दिन

साधना की अवधि के दौरान, नियमितता और अनुशासन बनाए रखना अति आवश्यक है।

साधना का दिन और समय

  • दिन: चेटी यक्षिणी साधना किसी भी शुभ दिन जैसे पूर्णिमा, अमावस्या, या शुक्रवार को शुरू कर सकते हैं। शुक्रवार को विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
  • समय: साधना का सर्वोत्तम समय रात्रि का होता है। यह समय यक्षिणी साधना के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

साधना के उपयोग

चेटी यक्षिणी साधना का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है:

  • धन और समृद्धि प्राप्ति: धन, समृद्धि और भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति के लिए।
  • वशीकरण: किसी व्यक्ति को अपने वश में करने या प्रभावित करने के लिए।
  • संकटों से मुक्ति: जीवन के विभिन्न संकटों और समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए।
  • आकर्षण शक्ति: दूसरों को आकर्षित करने और प्रभावित करने की शक्ति प्राप्त करने के लिए।
  • स्वास्थ्य लाभ: शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए।
  • आध्यात्मिक उन्नति: आध्यात्मिक जागरूकता और उच्च अनुभव प्राप्त करने के लिए।

साधना के दौरान सावधानियाँ

  1. पवित्रता का ध्यान: साधना के दौरान शरीर और मन की पवित्रता बनाए रखें।
  2. आहार: सात्विक आहार का पालन करें और तामसिक भोजन से बचें।
  3. नियमितता: साधना नियमित रूप से करें और बीच में बाधा न आने दें।
  4. श्रद्धा और विश्वास: साधना को पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ करें।
  5. संकल्प: साधना शुरू करने से पहले संकल्प लें और साधना समाप्ति पर इसे पूर्ण करें।
  6. गुरु का मार्गदर्शन: यदि संभव हो तो किसी योग्य गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त करें।
  7. साधना स्थल की शुद्धता: साधना स्थल को साफ और पवित्र रखें।
  8. मंत्र उच्चारण की शुद्धता: मंत्र का उच्चारण शुद्ध और स्पष्ट रूप से करें।
  9. ध्यान और एकाग्रता: साधना के दौरान ध्यान और एकाग्रता बनाए रखें।
  10. सकारात्मक मानसिकता: साधना के दौरान सकारात्मक और शांत मानसिकता बनाए रखें।

चेटी यक्षिणी साधना FAQ

1. चेटी यक्षिणी साधना क्या है?

चेटी यक्षिणी साधना एक प्राचीन और शक्तिशाली साधना है जिसमें साधक यक्षिणी देवी की आराधना करता है। इस साधना का उद्देश्य साधक को धन, समृद्धि, आकर्षण शक्ति और विभिन्न सिद्धियां प्राप्त करना है।

2. चेटी यक्षिणी कौन हैं?

चेटी यक्षिणी एक दिव्य शक्ति हैं जो साधक को आशीर्वाद देती हैं और उसकी इच्छाओं को पूर्ण करती हैं। यक्षिणी देवी का प्रमुख कार्य साधक की सभी मनोकामनाओं को पूरा करना और उसे समृद्धि प्रदान करना है।

3. चेटी यक्षिणी साधना के प्रमुख लाभ क्या हैं?

चेटी यक्षिणी साधना के अनेक लाभ हैं, जिनमें धन और समृद्धि की प्राप्ति, सभी इच्छाओं की पूर्ति, आकर्षण शक्ति, वशीकरण, संकटों से मुक्ति, स्वास्थ्य लाभ, आध्यात्मिक उन्नति, और शत्रुओं से रक्षा शामिल हैं।

4. चेटी यक्षिणी साधना के लिए क्या सामग्री आवश्यक है?

चेटी यक्षिणी साधना के लिए निम्नलिखित सामग्री आवश्यक है:

  • चेटी यक्षिणी की मूर्ति या चित्र
  • पीले वस्त्र
  • हल्दी की माला
  • गुलाब के फूल
  • धूप और दीपक
  • पंचामृत
  • सिंदूर
  • मिठाई

5. चेटी यक्षिणी साधना कब और कैसे की जाती है?

चेटी यक्षिणी साधना किसी भी शुभ दिन जैसे पूर्णिमा, अमावस्या, या शुक्रवार को की जा सकती है। साधना का सर्वोत्तम समय रात्रि का होता है, विशेषकर मध्यरात्रि में। साधना विधि में मूर्ति या चित्र स्थापना, अभिषेक, धूप-दीप जलाना, फूल अर्पण, मंत्र जप, आरती और प्रसाद अर्पण शामिल हैं।

6. चेटी यक्षिणी साधना कितने दिनों की होती है?

चेटी यक्षिणी साधना की अवधि साधक की सुविधानुसार हो सकती है। इसे 21 दिन, 40 दिन, या 108 दिन तक किया जा सकता है। साधना की अवधि के दौरान नियमितता और अनुशासन बनाए रखना आवश्यक है।

7. चेटी यक्षिणी साधना का उपयोग किसके लिए किया जा सकता है?

चेटी यक्षिणी साधना का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है जैसे धन और समृद्धि प्राप्ति, वशीकरण, संकटों से मुक्ति, आकर्षण शक्ति प्राप्त करना, स्वास्थ्य लाभ, और आध्यात्मिक उन्नति।

8. साधना के दौरान कौन-कौन सी सावधानियाँ बरतनी चाहिए?

साधना के दौरान निम्नलिखित सावधानियाँ बरतनी चाहिए:

  • शरीर और मन की पवित्रता बनाए रखें।
  • सात्विक आहार का पालन करें।
  • साधना नियमित रूप से करें और बीच में बाधा न आने दें।
  • साधना को पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ करें।
  • साधना स्थल को साफ और पवित्र रखें।
  • मंत्र का उच्चारण शुद्ध और स्पष्ट रूप से करें।
  • ध्यान और एकाग्रता बनाए रखें।
  • सकारात्मक और शांत मानसिकता बनाए रखें।

9. क्या चेटी यक्षिणी साधना में किसी गुरु का मार्गदर्शन आवश्यक है?

यदि संभव हो तो किसी योग्य गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त करना लाभकारी होता है। गुरु के मार्गदर्शन से साधना अधिक प्रभावशाली और सफल हो सकती है।

10. चेटी यक्षिणी साधना में कौन-कौन से मंत्र का उपयोग किया जाता है?

चेटी यक्षिणी साधना में निम्नलिखित मंत्र का उपयोग किया जाता है:

  • मंत्र: “ॐ ह्रीं श्रीं चेटी यक्षिणी कार्य सिद्धिम् देही देही स्वाहा”

11. साधना के दौरान क्या सावधानी रखनी चाहिए?

साधना के दौरान शारीरिक और मानसिक स्वच्छता बनाए रखें, साधना का समय नियमित रखें, ध्यान और एकाग्रता बनाए रखें, और सकारात्मक मानसिकता बनाए रखें।

12. साधना के बाद क्या करना चाहिए?

साधना के बाद यक्षिणी देवी की आरती करें, प्रसाद वितरित करें और साधना का संकल्प पूर्ण करें। साधना के बाद प्राप्त अनुभवों और सिद्धियों को दैनिक जीवन में सकारात्मक उपयोग में लाने का प्रयास करें।

13. साधना के लिए किस प्रकार का आहार लेना चाहिए?

साधना के दौरान सात्विक आहार का पालन करें और तामसिक भोजन से बचें। शुद्ध और पौष्टिक भोजन का सेवन करें जिससे शारीरिक और मानसिक ऊर्जा बनी रहे।

14. साधना के दौरान क्या वर्जित है?

साधना के दौरान नकारात्मक विचारों, तामसिक भोजन, अनुचित आचरण, और शारीरिक अस्वच्छता से बचें। साधना को पूर्ण पवित्रता और अनुशासन के साथ करें।

15. साधना की सफलता के लिए क्या आवश्यक है?

साधना की सफलता के लिए पूर्ण श्रद्धा, विश्वास, नियमितता, अनुशासन, और सकारात्मक मानसिकता आवश्यक हैं। साधना को विधिपूर्वक और नियमों का पालन करते हुए करें।

16. चेटी यक्षिणी साधना से क्या-क्या सिद्धियाँ प्राप्त हो सकती हैं?

चेटी यक्षिणी साधना से धन-संपत्ति, वशीकरण शक्ति, आकर्षण शक्ति, संकटों से मुक्ति, स्वास्थ्य लाभ, आध्यात्मिक जागरूकता, और शत्रुओं से रक्षा जैसी सिद्धियाँ प्राप्त हो सकती हैं।

17. क्या चेटी यक्षिणी साधना से सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं?

हाँ, चेटी यक्षिणी साधना से साधक की सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं यदि वह साधना को विधिपूर्वक और श्रद्धापूर्वक करता है।

18. साधना के दौरान मंत्र जप कैसे करें?

साधना के दौरान हल्दी की माला से चेटी यक्षिणी मंत्र का 108 बार जप करें। मंत्र जप करते समय ध्यान और एकाग्रता बनाए रखें।

19. क्या चेटी यक्षिणी साधना से शत्रुओं से रक्षा हो सकती है?

हाँ, चेटी यक्षिणी साधना से साधक के शत्रु उससे दूर रहते हैं और उसे कोई हानि नहीं पहुंचा सकते। साधना शत्रुओं से रक्षा करने में सहायक होती है।

20. चेटी यक्षिणी साधना का प्रमुख उद्देश्य क्या है?

चेटी यक्षिणी साधना का प्रमुख उद्देश्य साधक की सभी इच्छाओं की पूर्ति करना, धन और समृद्धि प्राप्त करना, और जीवन में सकारात्मकता और सुख-शांति का संचार करना है।

चेटी यक्षिणी साधना एक अत्यंत प्रभावशाली और पवित्र साधना है। इसे विधिपूर्वक और श्रद्धापूर्वक करने से साधक को अनेक सिद्धियों और लाभों की प्राप्ति होती है। साधना का सही तरीके से पालन करके साधक अपने जीवन में अद्वितीय सफलताएं प्राप्त कर सकता है।

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