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Santoshi Mata Chalisa paath

संसारिक सुख देने वाली संतोषी माता चालीसा का पाठ करने से कई लाभ हो सकते हैं, जैसे कि:

  1. संतोष और शांति: संतोषी माता चालीसा का पाठ करने से मानसिक शांति और संतोष मिलता है।
  2. आर्थिक समृद्धि: यह चालीसा आर्थिक समृद्धि के लिए प्रार्थना करने में सहायक हो सकती है।
  3. दुःखों का नाश: संतोषी माता चालीसा का पाठ करने से दुःखों का नाश हो सकता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आभास हो सकता है।
  4. समस्याओं का हल: यह चालीसा समस्याओं के हल के लिए भी प्रार्थना कर सकती है और जीवन में समृद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
  5. प्रार्थना की सहायता: संतोषी माता चालीसा का पाठ करने से प्रार्थना की शक्ति में वृद्धि होती है और उसे अपनी इच्छाओं की प्राप्ति के लिए और भगवान की कृपा के लिए सहायता मिलती है।
  6. कर्म सफलता: यह चालीसा कर्म सफलता के लिए भी प्रार्थना कर सकती है और उसे सहायता प्रदान कर सकती है।
  7. आत्मिक उन्नति: संतोषी माता चालीसा का पाठ करने से आत्मिक उन्नति होती है और व्यक्ति की आत्मा में शांति और संतोष की भावना उत्पन्न होती है।
  8. समाज में सम्मान: इस चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को समाज में सम्मान प्राप्त हो सकता है।
  9. सफल जीवन: संतोषी माता चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति का जीवन सफल और संतोषपूर्ण हो सकता है।
  10. भक्ति की वृद्धि: इस चालीसा का पाठ करने से भक्ति की वृद्धि होती है और भक्त भगवान की प्राप्ति के लिए और सम्पूर्णता की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

संतोषी माता चालीसा

दोहा

बन्दौं संतोषी चरण रिद्धि-सिद्धि दातार। ध्यान धरत ही होत नर दुख सागर से पार।।

भक्तन को संतोष दे संतोषी तव नाम। कृपा करहु जगदंबा अब आया तेरे धाम।।

चौपाई

जय संतोषी मात अनुपम। शांतिदायिनी रूप मनोरम।।

सुंदर वरण चतुर्भुज रूपा। वेश मनोहर ललित अनुपा।।

श्वेतांबर रूप मनहारी। माँ तुम्हारी छवि जग से न्यारी।।

दिव्य स्वरूपा आयत लोचन। दर्शन से हो संकट मोचन।।

जय गणेश की सुता भवानी। रिद्धि-सिद्धि की पुत्री ज्ञानी।।

अगम अगोचर तुम्हरी माया। सब पर करो कृपा की छाया।।

नाम अनेक तुम्हारे माता। अखिल विश्व है तुमको ध्याता।।

तुमने रूप अनेकों धारे। को कहि सके चरित्र तुम्हारे।।

धाम अनेक कहां तक कहिए। सुमिरन तब करके सुख लहिए।।

विंध्याचल में विंध्यवासिनी। सर्वानंद करो कल्याणी।।

तुम्हीं शारदा अमृत वाणी। तुम्हारी महिमा जल में थल में। दुख दरिद्र सब मेटो पल में।।

जेते ऋषि और मुनीशा। नारद देव और देवेशा। इस जगती के नर और नारी। ध्यान धरत हैं मात तुम्हारी।।

जापर कृपा तुम्हारी होती। वह पाता भक्ति का मोती।।

दुख दारिद्र संकट मिट जाता। ध्यान तुम्हारा जो जन ध्याता।।

जो जन तुम्हारी महिमा गावै। ध्यान तुम्हारा कर सुख पावै।।

जो मन राखे शुद्ध भावना। ताकी पूरण करो कामना।।

कुमति निवारि सुमति की दात्री। जयति जयति माता जगधात्री।।

शुक्रवार का दिवस सुहावन। जो व्रत करे तुम्हारा पावन।।

गुड़ छोले का भोग लगावै। कथा तुम्हारी सुने सुनावै।।

विधिवत पूजा करे तुम्हारी। फिर प्रसाद पावे शुभकारी।।

शक्ति-सामरथ हो जो धनको। मन में होवे ना अभिमान को।।

संतोषी माता की जय।

संतोषी माता चालीसा का पाठ करने की विधि:

  • संतोषी माता चालीसा का पाठ करने के लिए, आपको सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए।
  • संतोषी माता चालीसा का पाठ करने के लिए, आपको माता संतोषी की प्रतिमा के सामने बैठना चाहिए।
  • संतोषी माता चालीसा का पाठ करते समय, आपको एकाग्रता और भक्तिभाव रखना चाहिए।
  • संतोषी माता चालीसा का पाठ कम से कम 40 दिनों तक नियमित रूप से करना चाहिए।

संतोषी माता चालीसा एक शक्तिशाली और मंगलकारी चालीसा है

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