Skanda Mata Chalisa paath

भय नष्ट कर ज्ञान को बढाने वाली स्कंद माता चालीसा का पाठ करने से निम्नलिखित लाभ होते हैं:

  1. कष्टों से मुक्ति: स्कंद माता चालीसा का पाठ करने से भक्त को जीवन में आने वाले कष्टों से मुक्ति मिलती है।
  2. शक्ति और साहस: चालीसा का पाठ करने से भक्त को शक्ति और साहस मिलता है जो उन्हें जीवन में सफलता की ओर ले जाता है।
  3. भय का नाश: माता स्कंद माता की कृपा से चालीसा का पाठ करने से भक्त का भय दूर होता है।
  4. स्वास्थ्य लाभ: चालीसा का पाठ करने से भक्त को स्वास्थ्य में सुधार मिलता है।
  5. धन संपत्ति: माता स्कंद माता की कृपा से चालीसा का पाठ करने से भक्त को धन संपत्ति की प्राप्ति होती है।
  6. कार्य सफलता: चालीसा का पाठ करने से भक्त के कार्यों में सफलता मिलती है।
  7. परिवार की सुरक्षा: रेनुका देवी चालीसा का पाठ करने से परिवार की सुरक्षा में वृद्धि होती है।
  8. आत्मविश्वास: चालीसा का पाठ करने से भक्त का आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें अपनी क्षमताओं में विश्वास होता है।
  9. धार्मिक उत्थान: चालीसा का पाठ करने से भक्त का धर्मिक उत्थान होता है।
  10. मानसिक शांति: स्कंद माता चालीसा का पाठ करने से भक्त को मानसिक शांति मिलती है और उनका मन प्रसन्न रहता है।

स्कंद माता चालीसा

जय स्कंदमाता, जय स्कंदमाता!

दोहा

जय स्कंदमाता, जय जगदंबा, जय त्रिपुर सुंदरी, जय भवानी। कमल आसन बैठि, कुमार को गोद लिए, सुंदर रूप निहारि, सब मन मोहिए।

चौपाई

सिंहासन गता नित्य, पद्माश्रि तकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी, स्कंदमाता यशस्विनी।।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:। स्कंदमाता जगन्माता, सर्व दुःख हरिणी।।

कार्तिकेय स्वामी की, तू जननी सुखकारी। रक्षा करो जगन्माता, भक्तों की लाज बचाओ।।

दोहा

पांचवीं शक्ति हो तुम, नवदुर्गा की माता। दुष्टों का नाश करो, भक्तों की सुखदाता।।

चौपाई

कमल आसन बैठि हो, कुमार गोद में लिए। सिंह पर सवार हो तुम, त्रिपुर सुंदरी कहिए।।

चार भुजाओं वाली हो, अस्त्र-शस्त्र धारण किए। मुक्ति देती हो भक्तों को, दुखों का नाश किए।।

दोहा

सोने की माला पहने हो, मुकुट शीश पर सजाए। रत्न जड़ित वस्त्र पहने हो, तन पर आभूषण सजाए।।

चौपाई

देवी स्कंदमाता की, स्तुति करें जो कोई। मनोकामना पूर्ण होती, दुखों से मिलता छुटकारा।।

भक्तों की रक्षा करती हो, विपत्तियों से बचाती हो। संकटों से उबारती हो, सुख-शांति प्रदान करती हो।।

दोहा

माँ स्कंदमाता की जय हो, जय जय जय जगदंबा। भक्तों की रक्षा करो, दुखों का नाश करो।।

चौपाई

आरती

जय तेरी हो स्कंद माता, पांचवां नाम तुम्हारा आता। करो कृपा मुझ पर जगन्माता, दुखों का नाश करो।।

सिंह पर सवार हो, कुमार को गोद में लिए। त्रिपुर सुंदरी कहिए, जगदंबा तुम ही हो।।

दोहा

माँ स्कंदमाता की जय हो, जय जय जय जगदंबा। भक्तों की रक्षा करो, दुखों का नाश करो।।

चौपाई

चालीसा समाप्त

इति स्कंदमाता चालीसा समाप्त

नोट:

  • किसी भी पंचमी को या नवरात्रि मे माता की पूजा की जाती है
  • नवरात्रि के पांचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है।
  • इस चालीसा का पाठ करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और दुखों से छुटकारा मिलता है।

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